• तीन दिवसीय प्रशिक्षण में शामिल हुए जिले के चार स्रोत शिक्षक

रायपुर। करोना कॉल के दौरान लगभग 18 माह तक स्कूल बंद होने से पढ़ाई के नुकसान की भरपाई अब “नवा जतन” सेतु 2.0 के माध्यम से की जाएगी। कक्षा स्तर पर पिछड़े हुए बच्चों को उपचारात्मक शिक्षा देने की यह योजना छत्तीसगढ़ शासन द्वारा शुरू की गई है।
इस संबंध में गत महीने बेसलाइन आंकलन पूरे छत्तीसगढ़ राज्य में आयोजित किए गए थे। इस की प्रविष्टि छात्रवार रिकॉर्ड पोर्टल पर पूरे छत्तीसगढ़ में 96% बच्चों की एंट्री की गई है। जिससे प्रत्येक बच्चे के शैक्षिक स्तर का पता लगाया जा सकता है कि बच्चा किस कक्षा के स्तर पर है।
स्कूल शिक्षा मंत्री डॉक्टर प्रेमसाय सिंह टेकाम ने राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद रायपुर में नवाजतन कार्यक्रम का शुभारंभ किया। उन्होंने तीन दिवसीय प्रशिक्षण में राज्य से उपस्थित स्रोत समूह के सदस्यों को भी संबोधित किया। उन्होंने कहा नवा जतन मार्गदर्शिका का उपयोग कर पढ़ाई में पिछड़ रहे बच्चों को वर्तमान कक्षा के स्तर तक लायें। करोनाकाल में राज्य के स्कूलों में ऐसे बच्चे जिन्होंने लर्निंग लॉस के कारण वर्तमान कक्षा में पिछड़े हुए हैं। ऐसे छात्रों को उपचारात्मक शिक्षण प्रदान करने के लिए नवा जतन कार्यक्रम संचालित होगा। राज्य स्तर पर इसके लिए तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया था। जिसके लिए स्कूल शिक्षा विभाग के एनसीईआरटी सेतू 2.0 के अंतर्गत नवा जतन कार्यक्रम का निर्माण किया गया है। इस दौरान स्कूल शिक्षा मंत्री डॉक्टर प्रेमसाय सिंह टेकाम ,शिक्षा सचिव डॉ कमलप्रीत सिंह ,संयुक्त सचिव शिक्षा एवं एनसीआरटी डायरेक्टर श्री राजेश सिंह राणा ,डॉ योगेश शिव लहरी अतिरिक्त संचालक एनसीईआरटी उपस्थित रहे।
राज्य स्तर पर आयोजित तीन दिवसीय प्रशिक्षण में धमतरी जिले से स्रोत व्यक्ति के रूप में परविंदर कौर गिल व्याख्याता शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय मुजगहन, नंद किशोर साहू प्रधान पाठक शासकीय माध्यमिक शाला भोथली, गुमान सिंह साहू सहायक शिक्षक प्राथमिक शाला फुसेरा, नरेंद्र कुमार देवांगन व्याख्याता डाइट नगरी शामिल हुए और प्रशिक्षण लिया।
प्रशिक्षण के दौरान एनसीईआरटी द्वारा तैयार मॉड्यूल का राज्य स्रोत शिक्षक सुनील मिश्रा एवं उनकी टीम ने विस्तार से समझाया।
प्रशिक्षण उपरांत अब जिले के सभी संकुलों के संकुल शैक्षिक समन्वयक को दो दिवसीय प्रशिक्षण दिया जाएगा।जिसमें नवा जतन कार्यक्रम को क्रियान्वित किए जाने के लिए विस्तार से उन्हें प्रशिक्षित किया जाएगा। प्रशिक्षण के उपरांत सभी शैक्षिक समन्वयक अपने संकुल के अंतर्गत आने वाले सभी स्कूलों में कक्षा पहली से आठवीं तक अध्यापन कार्य करने वाले सभी शिक्षकों को प्रशिक्षित करेंगे एवं कारोना काल के दौरान जो लर्निंग लॉस बच्चों में हुआ है उसकी भरपाई की जा सके।