ओलंपिक गेम्स में देख ने इस साल सबसे अच्छा प्रदर्शन किया। देश की उम्मीदों से ज्यादा उन्होंने कर दिखाया है। एक समय था जब क्रिकेट के मैदान में हर किसी के जुबान पर सचिन तेंदूलकर का नाम होता था। वैसे ही प्रदेश की राजनीति में भाजपा के 15 साल के शासन काल को उखाड्ने के लिए अखिल भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने भूपेश बघेल को जिम्मेदारी दी।
उन्होंने टीम के कप्तान का दायित्व संभालते हुए अपनी टीम के खिलाडिय़ों के साथ टीम भावना के साथ काम कर पूरी भाजपा की टीम का सफाया कर दिया। टीम का सफाया करने में उनके वे वायदे काम आए जिस पर जनता को भरोसा दिलाया गया। जनता ने भी उन पर सचिन तेंदूलकर की तरह भरोसा जताया। परिणाम आज आपके सामने है। क्रिकेट में सचिन जो कीर्तिमान बनाए उसी तरह मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने राज्य के विकास को नए सरिे से गढ़ कर 360 डिग्री का नया एंगल देने का प्रयास किया है जो आने वाले समय में मील का पत्थर साबित होगा। छत्तीसगढ़ के लोगों को राज्य में विकास के साथ उनमेें सुरक्षा और आत्मसम्मान दिलाने का प्रयास किया गया। हालांकि इन पौने तीन सालों में हमने कोरोना जैसी विपदा को झेलते हुए राज्य में मजदूरों से लेकर बाजार की गतिविधियों को निरंतर बनाए रखा। समय के साथ उसमें परिवर्तन कर हर क्षेत्र में बढ़त हासित किया। अब वह समय आ गया है जब अपने किसानों को उनकी पैदावार को पूरा भुगतान करने के साथ उनके कर्जाैं के भार को कम करने जा रहे हैं।
सिंचाई कर्ज को लेकर किसानों की चिंता को दूर करने सरकार ने फिॅर एक बार इसे माफ किया है। आने वाले समय में हम प्रदे्रश के वनवासी से लेकर उन क्षेत्रों पर फोकस करेंगे जहां पर आधार विकसित करने की आवश्यकता है। ग्रामीण और वन क्षेत्रों में स्थानीय संसाधनों के उपयोग और स्थानीय लोगों की भागीदारी से इन अंचलों में तेजी से विकास किया जा सकता है, जिससे गांवों और शहरों के बीच बन गई गहरी खाई को पाटा जा सके। राजधानी रायपुर के पुलिस परेड ग्राउंड में ध्वजारोहण के बाद मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने प्रदेशवासियों को स्वतंत्रता दिवस की बधाई और शुभाकामनाएं देते हुए कई सौगात दिए।
छत्तीसगढ़ के पुरखों के सपनों को साकार करने नवा छत्तीसगढ़ बनाने की ओर भूपेश बघेल सरकार ने एक और कदम बढ़ाया है। अब विकास का ‘छत्तीसगढ़ मॉडल वास्तव में साकार हो रहा है। विकास की हमारी समझ, उन मानवीय मूल्यों से प्रेरित हैे। हमें मानवता को उन नैतिक जड़ों को सींचना है जहां से अनुशासन और स्वतंत्रता दोनों का जन्म होता है। गरीबों के आंसू पोंछना और कमजोर तबकों को शक्ति देना ही भूपेश सरकार कर पहली प्राथमिकता है। राज्य बनने के साथ ही इसके हर हिस्से में विकास के असंतुलन को समाप्त करने के प्रयास किए गए, लेकिन इस दिशा में सही प्रयास नहीं किए गए। ग्रामीण और वन क्षेत्रों में स्थानीय संसाधनों के उपयोग और स्थानीय लोगों की भागीदारी से इन अंचलों में तेजी से विकास किया जा सकता है, जिससे गांवों और शहरों के बीच बन गई गहरी खाई को पाटा जा सके।
आदिवासी और परंपरागत वन निवासी समुदायों को जमीन का जो अधिकार मिल सकता था, वह भी सही ढंग से नहीं दिया गया। भूपेश सरकार ने न्याय की शुरुआत इसी मुद्दे से की थी। आज मात्र पौने तीन वर्षों में उन परिवारों के निरस्त दावों की समीक्षा करके बड़े पैमाने पर व्यक्तिगत वन अधिकार पत्र दिए गए हैं। साथ ही नगरीय क्षेत्रों में भी वन अधिकार पत्र देने किा अभिवन प्रयास छत्तीसगढ़ ने किया है। पूरे देश में ऐसा करने वाला पहला राज्य बन गया है। छत्तीसगढ़ में पहले मात्र 7 लघु वन उपजों को ही न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीदा जाता था। कांग्रेस सरकार आने के बाद 52 लघु वनोपजों को समर्थन मूल्य पर खरीदने की व्यवस्था की है। इस तरह से 500 करोड़ रुपए से अधिक सालाना अतिरिक्त आमदनी आदिवासी एवं वन आश्रित परिवारों को प्राप्त हो रही है। राज्य में जो बदलाव हो रही है, उसकों अब राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिल रही।
छत्तीसगढ़ को धान का कटोरा कहा जाता है। कांग्रेस सरकार ने इसलिए धान खरीदी को भी न्याय का मुद्दा बनाया। किसानों को समर्थन मूल्य के हिसाब से 17 हजार 240 करोड़ रुपए का भुगतान किया गया, जो छत्तीसगढ़ के इतिहास में अब तक सबसे बड़ा कीर्तिमान है। राजीव गांधी किसान न्याय योजना के तहत पहले वर्ष में 5 हजार 628 करोड़ रुपए की प्रोत्साहन राशि किसानों को दी गई है। सरकार ने 17 लाख से अधिक किसानों की लंबित सिंचाई जलकर राशि 244 करोड़ रुपए माफ किए थे और अब एक बार फिर 30 जून 2020 तक लंबित सिंचाई जलकर की राशि लगभग 80 करोड़ रुपए माफ करने का निर्णय लिया है। सुराजी गांव योजना के माध्यम से ‘नरवा-गरुवा-घुरुवा-बारी के संरक्षण और विकास में मिल रही सफलता मील का पत्थर है। इसके विस्तार में ‘गोधन न्याय योजना से गौवंश के संरक्षण, गौठान की गतिविधियों को प्रोत्साहन मिला है। जब गोबर सवा सौ करोड़ रुपए का धन बरसा है। गोधन ग्रामीण व शहरी जरूरतमंद तबकों के लिए वरदान साबित हुआ है। वर्मी कम्पोस्ट, सुपर कम्पोस्ट, सुपर कम्पोस्ट प्लस जैसे नए उत्पाद अब ग्रामीण क्षेत्रों में समृद्धि के सूत्रधार बन रहे हैं।
इसके उपयोग से छत्तीसगढ़ की माटी को जहरीले रसायनों से आजादी दिलाने में भी सफल होंगे और अच्छे पोषणयुक्त खाद्यान्नों के उत्पादन में भी नया मुकाम हासिल करेंगे। वहीं छत्तीसगढ़ के वे मजदूरों को राजीव गांधी ग्रामीण भूमिहीन कृषि मजदूर न्याय योजनाÓ का लाभ मिलेगा। इस योजना के तहत लगभग 10 लाख मजदूर भाई-बहनों को 6 हजार रुपए सालाना अनुदान सहायता दी जाएगी। छत्तीसगढ़ गृह निर्माण मण्डल के माध्यम से ‘राजीव नगर आवास योजना लागू की गई है। विभिन्न आवासीय योजनाओं के हितग्राहियों को रियायतें दी गई हैं।
राजस्व संबंधी कामकाज की जटिलता से राहत दिलाने नामांतरण की प्रक्रिया का सरलीकरण किया जा रहा है। चार नये जिलों और 18 नये तहसीलों के गठन मुख्यमंत्री ने विकेन्द्रीयकरण के सिलसिले को और आगे बढ़ाया है।
स्वास्थ्य सुविधा को बेहतर बनाकर छत्तीसगढ़ में इसका अभाव दूर करने, उसे जरूरतमंद जनता तक पहुंचाने और गुणवत्ता सुनिश्चित करने को लेकर प्राथमिकताएं तय की गई है। गांवों, कस्बों, बसाहटों, पारा-मोहल्लों तक सुसज्जित चलित अस्पताल व शिविरों की सुविधाएं पहुंचाने की व्यवस्था की। मुख्यमंत्री हाट-बाजार क्लीनिक योजना, मुख्यमंत्री शहरी स्लम स्वास्थ्य योजना, दाई-दीदी क्लीनिक से लाखों लोगों को लाभ मिला। मलेरियामुक्त बस्तर अभियान बस्तर में 45 प्रतिशत और सरगुजा संभाग में 60 प्रतिशत तक की कमी आई। अब मलेरियामुक्त छत्तीसगढ़ अभियान का शंखनाद किया गया है। डॉक्टरों तथा अन्य सुविधाओं की कमी दूर करने हेतु प्राथमिकता से कदम उठाए हैं। कोरोना काल में अस्पतालों में आईसीयू बिस्तरों की संख्या 279 से बढ़कर 729, एचडीयू बिस्तरों की संख्या शून्य थी, जो अब बढ़कर 515 हो गई, ऑक्सीजनयुक्त बिस्तरों की संख्या 1 हजार 242 से बढ़कर 7 हजार एक सौ, सामान्य बिस्तरों की संख्या 15 हजार से बढ़कर लगभग 30 हजार, वेंटिलेटर्स की संख्या 204 से बढ़कर 723 हो गई। ऑक्सीजन सिलेण्डर और कन्सेंट्रेटर की संख्या तीन गुने से अधिक बढ़ गई है।
राज्य में अधोसंरचना को विकसित करने कार्ययोजना बनाई गई है और स्पष्ट लक्ष्य रखा गया है कि सारे काम दो साल में पूरे कर लिए जाएं। बिजली के क्षेत्र में भी प्राथमिकताएं तय की। अब नए सिरे से परियोजनाएं बनाई गई हैं, जो प्रगति पर हैं। इनसे प्रदेश में बिजली आपूर्ति की गुणवत्ता में और अधिक सुधार तथा स्थायित्व आएगा। जल जीवन मिशन के माध्यम से हम ग्रामीण क्षेत्रों में प्रति व्यक्ति प्रतिदिन 55 लीटर पेयजल उपलब्ध कराने की दिशा में काम कर रहे हैं। हमारा लक्ष्य है कि 39 लाख ग्रामीण घरों में वर्ष 2023 तक नल से शुद्ध पेयजल देने का काम पूरा हो जाए। विगत ढाई वर्षों में प्रदेश में 18 हजार 492 करोड़ रुपए के पंूजीनिवेश से 1 हजार 145 नए उद्योग स्थापित हुए हैं और 28 हजार से अधिक लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार मिला है। सरकारी, अर्धसरकारी, निजी, नगरीय-ग्रामीण-वन जैसे हर क्षेत्र में हमने नए रोजगार के अवसर बनाए हैं। नियमों को शिथिल करते हुए अनेक लोगों को अनुकम्पा नियुक्ति दी गई है। तृतीय लिंग समुदाय के लोगों को पुलिस में भर्ती किया गया है। विभिन्न उपायों से बेरोजगारी दर को 22 प्रतिशत से घटाकर 3 प्रतिशत तक लाने में सफलता मिली है। आने वाले समय में नई आशाओं का गढ़ बनेगा छत्तीसगढ़।
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