बचपन के मित्र और ग्रामीणों से की चर्चा

ग्रामीणों से चर्चा करते हुए मुख्यमंत्री श्री बघेल

रायपुर। छत्तीसगढ़ी और छत्तीसगढ़िया संस्कृति में हमेशा से ही रमे रहने वाले मुख्यमंत्री भूपेश बघेल आज नया पानी खाने पैतृक गांव कुरुदडीह पहुंचे। इसके बाद बचपन के मित्र और अन्य ग्रामीणों से भी उन्होंने भेंट की।
कुंवार की दशमी यानि दशहरा के दिन छत्तीसगढ़ के अधिकांश परिवार नवा पानी खाता है। यह सदियों से चली आ रही परंपरा है, जिसका निर्वहन आज भी किया जा रहा है। मुख्य मंत्री भूपेश बघेल भी परंपरा निभाने अपने पैतृक गांव कुरुदडीह पहुंचे और पूरे रीति नेंग के साथ नवा पानी खाया।
मुख्यमंत्री ने इस दौरान ग्रामीणों से पूछा कि क्या उन्होंने नया खाई की पूजा कर ली। उन्होंने कहा कि हर साल दशहरे में आपके साथ बहुत अच्छा लगता है। ग्रामीणों ने भी कहा कि हम भी उत्सुकता से इस दिन का इंतजार करते हैं।

बचपन की याद हुई ताजा

नवा पानी खाने के बाद मुख्यमंत्री श्री बघेल अपने मित्रों से भी मिले और बचपन के किस्सों को भी साझा किया। उन्होंने बताया कि किस तरह से वह अपने साथियों के साथ गांव की विभिन्न गलियों में घूमा करते थे।
बाल सखा नारायण निषाद को देख श्री बघेल ने पूछा – ” तोला चश्मा कब ले लग गे”? पिछली बार जब वे आए थे तब उनके मित्र को चश्मा नही लगा था। उसी दौरान नारायण ने श्री बघेल से कहा था कि “कोनो दीन अपन हवाई जहाज दिखाबे”। इस बार श्री बघेल हेलीकॉप्टर से गांव पहुंचे थे और अपने मित्र को उसमें बिठाया।


श्री बघेल ने गोधन न्याय योजना की जानकारी भी ली। जिस पर गांव के एक बुजुर्ग ने बताया कि वह हर दिन 80 रुपए का गोबर बेच लेते हैं।
मुख्यमंत्री ने ग्रामीणों की मांगे भी सुनी और इनसे संबंधित निर्माण कार्य आरंभ कराने के निर्देश कलेक्टर डॉ. सर्वेश्वर नरेंद्र भूरे को दिया। इस दौरान पुलिस अधीक्षक बद्री नारायण मीणा, जिला पंचायत सीईओ सच्चिदानंद आलोक सहित अन्य अधिकारी, जनप्रतिनिधि और ग्रामीण मौजूद रहे।