कांग्रेस में गुटबाजी दूर करने की जरूरत पर हाईकमान सक्रिय
रायपुर। छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री के पद को लेकर चल रही सियासत के बीच कांग्रेस आलाकमान के बुलावे पर गए मुख्यमंत्री भूपेश बघेल फिर एक बार लौटे हैं। हालांकि चार दिनों में दूसरी बार दिल्ली बुलावे को लेकर कांग्रेस विधायक और उनके मंत्रिमंडल के अनेक सदस्य इस बात को लेकर उद्धेलित थे आखिर हाईकमान उनके नेता को हटाने की कोशिश में तो नहीं लगा। उनके समर्थन में पहुंचे नेताओं ने अपने शक्ति बल के आधार पर यह बताने का प्रयास किया कि राज्य सरकार के साथ हम सब लोग एकजूट है। दिनभर चले घटना क्रम के बाद जब बैठक खत्म हुई तो यह बात सामने आई कि हाईकमान ने उनकी बातें सुनी और राज्य के विकास कार्यों को अवलोकन के बहाने आने का न्यौता स्वीकार कर लिया है। राज्य बनने के बाद ऐसा पहली बार हुआ है कि आलाकमान को अपनी बात कहने संख्या बल की आवयकता आन पड़ी। वहीं दूसरी ओर मुख्यमंत्री पद के दावेदार टीएस सिंहदेव भी वहां पर मौजूद थे। अब यह कहा जाने लगा है कि राजनीति की क्लॉस में मुख्यमंत्री पास हो गए। अब आलाकमान मामले में राज्य के दौरे के दौरान अपनी स्थिति स्पष्ट करें। छत्तीसगढ़ बनने के बाद ऐसी स्थिति दूसरी बार आई है। जब नया राज्य बना था तब भी कांग्रेस नेतृत्व को लेकर काफी बवाल हुआ था। आलाकमान दिल्ली में इसे तय नहीं कर पाई तो विधायकों के बीच आलाकमान के फैसले को बताने के पहले वरिष्ठ नेता विद्याचरण शुक्ल के बंगले पहुंचे थे। वहां पर आलाकमान के तीन नेता दिग्विजय सिंह, गुलाम नबी आजाद और प्रभा पटेल को कांग्रेस कार्यकर्ताओं के कोपभाजन का शिकार होना पड़ा। तब से लेकर कांग्रेस में गुटबाजी का दौर चला आ रहा था।
गुटबाजी खत्म करते ही मिली जीत
छत्तीसगढ़ में कांग्रेस दूसरे चुनाव में हारकर सत्ता से बाहर हो गई। सत्ता से बाहर होने के बाद कांग्रेस में अजीत जोगी वर्सेस संगठन की आपसी लड़ाई चलती रही। कांग्रेस में जो 10 सालों तक चलती रही। झीरम घाटी की घटना के बाद इस गुटबाजी को गंभीरता से लिया गया। उसके बाद हुए चुनाव में कांग्रेस को उम्मीद थी कि सहानुभूति लहर पार्टी को उभार लेगी, लेकिन इस पर सफलात नहीं मिली। उसके बाद जोगी के क्रियिाकलापों पर नजर रखनी शुरू हुई और उन्हें कांग्रेस से बाहर करने की शुरू हो गई। वर्ष 2018 के चुनाव के एक साल पहले ही जोगी कुनबे को बाहर का रास्ता दिखा दिया। प्रदेश अध्यक्ष के रूप में भूपेश बघेल ने इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
सरकार आने के बाद संशय
कांग्रेस को विधानसभा चुनाव में स्पष्ट बहुमत मिलने के बाद कांग्रेस आलाकमान ने सभी कांग्रेस नेताओं के अनुभव और उनके कार्य का आंकलन शुरू किया और चार बड़े चेहरे को दौड़ मेें आगे रखा। इन चेेहरे में पहले पिछड़़ा वर्ग के नाम पर ताम्रध्वज साहू को आगे बढ़ाया। उनके नाम पर आपत्ति आई तक प्रदेश अध्यक्ष और पिछले चुनाव में कांग्रेस विधायक दल के नेता रहे टीएस सिंहदेव का नाम आगे किया। उनमें से प्रदेश अध्यक्ष भूपेश बघेल के नाम को विधायक दल के नेता के रूप में मुख्यमंत्री पद दिया गया। उस समय से यह चर्चा रही कि दोनों नेताओं को आधे-आधे कार्यकाल तक यह पद संभालना है। समय बीता आधा कार्यकाल पूरा होने के बाद यह चर्चा आगे होती रही। मामले को लेकर विधायक और उनके समर्थन में बंटते नजर आए। अब यही चर्चा कांग्रेस हाईकमान के लिए सिरदर्द बना गई है।
अब दो दौर में भूपेश आगे
मामले को लेकर दो दौर की बैठक राहुल गांधी के साथ हो चुकी है। मामले की गंभीरता को देखते हुए कांग्रेस हाईकमान अपनी स्थिति नहीं रख पा रही है। टीएस सिंहदेव इसे लेकर नाराज बताएं जाते हैं। वे स्पष्ट रूप से इस पर कुछ कहने से बचते है। दोना नेता पूरा दारोमदार आलाकमान पर छोड़ रहे है। अब समय आ गया है कि कांग्रेस हाईकमान इस पर निर्णय ले। कांग्रेस कार्यकर्ता अब मिशन 2023 में जुटने से पहले अपना मत जनता के सामने रख सके कि कांग्रेस राज्य के हर वर्ग के साथ रहकर राजनीति कर रही है। जनता के मन में भी यही सवाल आ रही है। फिर सत्ता में आने गुटबाजी खत्म करने की चुनौती को समय रहते पूरा करना पड़ेगा।
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