स्वसहायता समूहों की याचिका पर हाईकोर्ट ने कहा
रायपुर। महिला स्व सहायता समूहों को लेकर कोर्ट ने अहम फैसला सुनाया है। दरअसल छत्तीसगढ़ शासन के आदेश 26 नवंबर के आधार पर कई महिला स्व सहायता समूहों की ओर से अलग-अलग रिट याचिकाएं प्रस्तुत कर राज्य शासन के उक्त निर्णय को चुनौती देते हुए निरस्त करने की मांग की गई थी।

प्रकरण में संपूर्ण सुनवाई के बाद न्यायालय ने यह व्यवस्था दी है कि चूंकि राज्य शासन इस योजना को 1 फरवरी 2022 से लागू करेगा तब तक किसी भी स्व सहायता समूह को राज्य शासन बाहर नहीं कर रही है और उन्हें तब तक कार्य करने की अनुमति शासन के निर्देशानुसार प्रदान की जाती है।

अनुबंध समाप्त कर सकती है

यदि शासन चाहे तो राज्य शासन एवं स्व सहायता समूहों के बीच जो अनुबंध हुए है, उन्हें अनुबंधों की शर्तो अनुसार ही उसे समाप्त कर सकता है। राज्य सरकार के उक्त निर्णय पर न्यायालय ने किसी भी प्रकार से रोक नहीं लगाया है। राज्य सरकार अब स्वतंत्र है कि अपनी कार्रवाई, आदेश के अनुसार कर सकती है।

12 जनवरी को अगली सुनवाई

राज्य सरकार की ओर से महाधिक्ता सतीश चन्द्र वर्मा ने न्यायालय को यह अवगत कराया है कि महिला समूहों को जो उनका मूल कार्य है जिसमें रेडी टू इट फूड को गरम पकाना, बच्चों को वितरित करना, ट्रांसपोर्ट करना जो मूल कार्य है वह करने की अनुमति राज्य सरकार पूर्व में ही दे चुका है और उनके हितों की रक्षा राज्य सरकार कर रही है। इसलिए अंतरिम आदेश की आवश्यकता महिला स्व सहायता समूह के लोगों के पक्ष में देने की आवश्यकता नहीं है। अब इस मामले को राज्य शासन के जवाब के बाद दिनांक 12 जनवरी 2022 को सुनवाई के लिए तय किया गया है।