भारत के पहले चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ बिपिन रावत आकाश कुसुम हो गये। आज तमिलनाडु के कुन्नूर में भारतीय सेना का हेलिकॉप्टर Mi-17V5 क्रैश हो गया। विमान में बिपिन रावत के साथ कई अधिकारी भी मौजूद थे। इस हादसे में बिपिन रावत और उनकी पत्नी मधुलिका रावत के साथ सभी सहयात्री शहीद हो गये।


इस हादसे में भारत ने एक ऐसी शक्सियत को खो दिया जो भारत की सुरक्षा में एक बड़ा योगदान रखता था। बिपिन रावत देश के पहले ऐसे व्यक्ति थे जिन्हें चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ के पद पर नियुक्त किया गया था।
वे 63 साल के थे, उनका जन्म 16 मार्च 1958 को हुआ था। रावत दिसंबर 1978 में सेना की 11वीं गोरखा राइफल्स की पांचवी बटालियन में कमीशन ऑफिसर बने। वे 31 दिसंबर 2016 से थलसेना प्रमुख भी रहे। उन्हें पूर्वी सेक्टर में वास्तविक नियंत्रण रेखा, कश्मीर घाटी और पूर्वोत्तर में कामकाज का अनुभव रहा।
CDS बनाए जाने से पहले बिपिन रावत 27वें थल सेनाध्यक्ष थे। आर्मी चीफ बनाए जाने से पहले उन्हें 1 सितंबर 2016 को भारतीय सेना का उप सेना प्रमुख नियुक्त किया गया था।


उनके परिवार में हमेशा से देश सेवा की परंपरा रही है। जनरल रावत के पिता भी आर्मी ऑफिसर थे और बतौर लेफ्टिनेंट जनरल रिटायर हुए। उनकी पढ़ाई हिमाचल प्रदेश के शिमला स्थित सेंट एडवर्ड स्कूल और देहरादून के कैमबेरियन हॉल स्कूल में हुई।
इसके बाद उन्होंने उसके बाद पुणे के खड़कवासला में नेशनल डिफेंस एकेडमी और फिर साल 1978 में वे इंडियन मिलिट्री एकेडमी से पास आउट हुए और यहां पर उन्हें स्वोर्ड ऑफ ऑनर जैसा सम्मान भी मिला।
दिसंबर 1978 में बिपिन रावत उसी गोरखा राइफल्स में बतौर लेफ्टिनेंट कमीशंड हुए जो कभी उनके पिता की यूनिट हुआ करती थी। बतौर लेफ्टिनेंट उनका सफर शुरू हुआ और इस सफर में वह आर्मी चीफ के पद और अब सीडीएस के पद तक पहुंचे।
जनरल रावत, मिलिट्री ऑपरेशंस डायरेक्टोरेट में जनरल स्टाफ ऑफिसर ग्रेड टू में रहे। लॉजिस्टिक स्टाफ ऑफिसर, कर्नल मिलिट्री सेक्रेटरी, डिप्टी मिलिट्री सेक्रेटरी, जूनियर कमांड विंग में सीनियर इंस्ट्रक्टर जैसे कई पदों पर वे सेना में रहे। जनरल रावत सदर्न आर्मी कमांड के मुखिया भी रह चुके हैं।


लेफ्टिनेंट जनरल बिपिन रावत को ऊंची चोटियों की लड़ाई में महारत हासिल है और आतंकवाद व उग्रवादी गतिविधियों से निपटने के लिए उन्होंने कई ऑपरेशन चलाए हैं।
साल 2016 में जब 18 सितंबर को जब उरी आतंकी हमला हुआ तो रावत वाइस चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ थे। सिर्फ तीन हफ्ते ही हुए थे जब उन्हें यह पद दिया गया था। इसके बाद पीओके में एक सर्जिकल स्ट्राइक हुई और इस बार रावत फिर से एक सर्जिकल स्ट्राइक को अंजाम देने वाली टीम का अहम हिस्सा थे।
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