रायपुर। छत्तीसगढ़ के 15 नगरीय निकायों में चुनाव प्रचार का अभियान राजनीतिक दलों ने शुरू कर दिया है। इसके साथ ही सियासत शुरू हो गई है। कांग्रेस और भाजपा ने सभी निकायों में अपने प्रत्याशी उतारे हैं। वहीं जोगी कांग्रेस का बीरगांव निगम पर ज्यादा फोकस है। सभी निकायों में चतुष्कोणीय मुकाबले के आसर है। जहां पर कांग्रेस भाजपा ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। दिग्गजों के गढ़ माने जाने वाले दुर्ग जिले के 4 निकायों में होने वाले चुनाव के लिए शंखनाद हो चुका है। इस चुनावी शंखनाद के बाद सबसे महत्वपूर्ण माने जाने वाले भिलाई निगम में चुनावी सरगर्मी तेज हो गई है। राजनीतिक लिहाज से भिलाई को काफी महत्वपूर्ण माना जाता है।
इस बार जिन चार नगर निगमों में चुनाव हो रहा है, उनमें से तीन दुर्ग जिले में ही हैं। यह मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और गृह मंत्री ताम्रध्वज साहू का गृह जिला है। भिलाई नगर निगम में तो कांग्रेस के महापौर और उसकी परिषद रही है। भिलाई विधायक देवेंद्र यादव यहां से महापौर रहे हैं। ऐसे में इस नगरीय निकाय पर कब्जा बरकरार रखना कांग्रेस के लिए प्रतिष्ठा का प्रश्न बन गया है। राजधानी क्षेत्र में देखा जाए तो बीरगांव नगर निगम मेें भाजपा का कब्जा रहा। कांग्रेस यहां पर अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। वरिष्ठ विधायक सत्यनारायण शर्मा और उनके पुत्र पंकज शर्मा यहां पर डटे हुए है।
कांग्रेस ने क्षेत्रीय विधायकों को सौंपी कमान
निकाय चुनाव में कांग्रेस ने प्रभारी मंत्रियों और क्षेत्रीय विधायकों को जीताने की जिम्मेदारी सौंपी है। वहीं भाजपा ने भी अपने विधायकों को यहां पर प्रभारी बनाया है। भाजपा ने जिला संगठन के पदाधिकारियों को चुनाव जीताने सरकार के खामियों को आगे लाने की रणनीति तैयार की है। सोमवार को नाम वापसी के बाद दोनों दलों ने अपने पदाधिकारियों की बैठक के लेकर प्रचार की शुरूआत कर दी है। अब तक दोनों दलों ने अपना घोषणा पत्र जारी नहीं किया है लेकिन यह समझा जा रहा है कि मतदान के दो दिन पूर्व इसे जारी किया जाएगा। कांग्रेस जहां विकास कार्यांे पर फोकस कर रही है।
बागियों ने उड़ाई नींद
नगरीय निकाय चुनाव में वार्ड पार्षद बनने कांग्रेस और भाजपा के एक दर्जन से अधिक बागी चुनाव मैदान में है। पार्टी की ओर से अब भी बागियों को मनाने की कवायद की जा रही हे। कांग्रेस से ज्यादा भाजपा के बागी नकिाय चुनाव मेें डटे हैं। कांग्रेस के बागी भिलाईनगर, चरोदा, नरहरपुर, प्रेमनगर औश्र अन्य निकायों में है। अब तक कई बागियों के नहीं मानने पर पार्टी के लोग मानने लगे हैं कि इससे पार्टी को नुकसान पहुंचेगा।
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