प्रदेश के लघु वनोपज संग्राहकों को अधिकतम लाभ पहुंचाने के लिए संचालित की जा रही योजनाएं रंग ला रही है। छत्तीसगढ़ को मिल रहे पुरस्कार इस बात की पुष्टि भी कर रहे हैं। ये सम्मान और ये पुरस्कार ये बताने के लिए पर्याप्त हैं कि प्रदेश सरकार जनता से किए अपने वादों को मक्कमता के साथ निभा रही है। ये अवार्ड्स इस बात का परिचायक है कि सरकार राज्य के लोगों के साथ न्याय कर रही है। इसका मतलब ये कहना गलत नहीं होगा कि ये पुरस्कार छत्तीसगढ़ के न्याय को मिला है।


इन पुरस्कारों की घोषणा विभिन्न राज्यों के प्रदर्शन के आधार पर की गई। जाहिर सी बात है इस उपलब्धि के लिए सरकार खुद की पीठ जरूर थपथपाएगी और थपथपाना भी चाहिए, क्योंकि अगर सरकार को इतने पुरस्कार और अलंकरण मिल रहे हैं तो इसके पीछे उनकी योजनाएं हो सकती हैं। सरकार के वादे घोषणा पत्र से निकलकर धरातल तक पहुंच रहे हैं। ये शायद उनकी योजनाओं का ही कमाल है कि आज छत्तीसगढ़ कई राज्यों को पछाड़ते हुए सफलता की सीढ़ी चढ़ रहा है।


देश के सामने उभरता ‘नवा छत्तीसगढ़’

ये कोई पहली दफा नहीं है जब भूपेश सरकार को ये पुरस्कार मिले हैं। अपनी योजनाओं को लेकर देशभर में चर्चा में रहे खुद प्रदेश के मुखिया ने भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तालियां बटोरी है। चाहे हम नरवा, गरूवा, घुरूवा, बाड़ी की बात करें, या जिसके लिए राज्य को हाल ही में पुरस्कृत किया गया है उस न्यूनतम समर्थन मूल्य योजना की, ऐसे में ये कहा जा सकता है कि छत्तीसगढ़ अब अपनी नई पहचान के साथ पूरे भारतवर्ष में उभरा है और यहां का रहवासी सच में ‘नवा छत्तीसगढ़’ गढ़ रहा है।


छत्तीसगढ़ सरकार के कार्यों पर मुहर

छत्तीसगढ़ की मौजूदा सरकार ने ज्यादा से ज्यादा वनोपजों को योजना में शामिल किया है। जो लोग आज जनता के सामने अपने कार्यकाल में किए गए विकास की दुहाई देते हें, जो खुद को आदिवासी और वनवासियों का हितैषी बताते हैं, उनके समय में प्रदेश में केवल 7 वनोपजो की खरीदी समर्थन मूल्य में की जाती थी, लेकिन अब भूपेश बघेल सरकार ने वनवासियों को सम्मान देते हुए उनकी जेब तक पैसा पहुंचाने के लिए वनोपजो की संख्या 52 तक बढ़ा दी। शायद सरकार का यही नवाचार छत्तीसगढ़ को एक नई पहचान दिला रहा है। छत्तीसगढ़ सरकार लोगों के साथ न्याय कर रही है और भारत सरकार का ये इनाम इस पर मुहर लगा रहा है।