•वरिष्ठ विधायक सत्यनारायण शर्मा ने कराई कांग्रेस में वापसी
रायपुर। बिरगांव नगर निगम चुनाव में कांग्रेस 19 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है। बिरगांव नगर निगम की सत्ता पर काबिज होने के लिए 21 पार्षदों की जरूरत है। मतगणना का परिणाम आते ही कांग्रेस पार्टी ने निर्दलीय पार्षदों को साधना शुरू कर दिया। दो निर्दलीय पार्षदों ने कांग्रेस को समर्थन दे दिया है। इससे बिरगांव में कांग्रेस की सरकार बनना तय हो गई है। दोनों निर्दलीय पार्षद कांग्रेस पार्टी से नाराज होकर निर्दलीय चुनाव लड़े थे।

बिरगांव नगर निगम में कुल 40 वार्ड शामिल हैं। बिरगांव में इस बार पार्षद ही महापौर का चुनाव करेंगे। महापौर बनाने के लिए 21 पार्षदों की जरूरत है, लेकिन बागी उम्मीदवारों ने दोनों पार्टियों का गणित बिगाड़ दिया। वे पार्टी से टिकट न मिलने पर बागी होकर निर्दलीय चुनाव लड़े, जिसमें छह निर्दलीय प्रत्याशियों को जीत हासिल हुई है। कांग्रेस को 19, भाजपा को 10 और जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ को पांच सीट पर जीत मिली है।

शंकुतला और सुाीला का समर्थन

बिरगांव निगम में सरकार बनाने के लिए 21 पार्षद होना जरूरी है। चुनाव परिणाम आते ही कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने दो निर्दलीय जीतकर आए पार्षद वार्ड क्रमांक एक की प्रत्याशी शकुंतला धन्नाू बंदे और वार्ड क्रमांक 11 के निर्दलीय पार्षद सुशीला मारकंडे को मना लिया है। दोनों पार्षदों ने कांग्रेस पार्टी को समर्थन कर दिया है। विधायक सत्यनारायण शर्मा इन पार्षदों के घर पहुंचे और पार्टी की सदस्यता दिलाकर अपनी तरफ कर लिया। इससे अब बिरगांव में कांग्रेस का रास्ता साफ हो गया है। कांग्रेस के नेताओं का दावा है कि चार पार्षद और संपर्क में हैं, जल्द ही वह भी कांग्रेस में शामिल हो सकते हैं।

बीरगांव से पिता-पुत्री ने जीता चुनाव

बीरगांव नगरीय निकाय चुनाव में लोकतंत्र की एक अनोखी तस्वीर सामने आई है( पिता और पुत्री दोनों ने चुनाव लड़ा और दोनों ही अलग-अलग वार्ड से जीत कर आए। पिता उबारनदास बंजारे ने जहां कांग्रेस से जीत हासिल की वहीं बेटी सुशीला मारकंडे निर्दलीय जीत कर आई है। इस चुनाव में जीतने के बाद पिता और बेटी दोनों बेहद खुश हैं। बेटी ने कहा कि मुझे मेरे जीत की खुशी से ज्यादा मेरे पिता की जीत की खुशी है। मैं राजनीति में नहीं आना चाहती थी, लेकिन मेरे वार्ड के लोग कहते थे कि जिस तरह से आपके पिता काम करते हैं, उसी तरह से आपको भी आगे आना चाहिए। तब मैंने चुनाव लडऩे का फैसला लिया। सुशीला ने बताया कि उनके पिता दो बार पार्षद रह चुके हैं अब तीसरी बार चुनाव जीते हैं। जिस तरह से मेरे पिता लोगों की सेवा करते थे, उसी तरह से मैं भी अपने वार्ड की जनता की सेवा करूंगी। वार्ड क्रमांक 11 से सुशीला मारकंडे ने 3 वोट से जीत हासिल की। कांग्रेस प्रत्याशी पुष्पा गोविंद साहू ने रिकाउंटिंग की अपील की थी। रिकाउंटिंग के बाद भी परिणाम नहीं बदले और सुशीला मारकंडे जीत गईं। सुशीला ने कांग्रेस पार्टी की प्रत्याशी पुष्पा गोविंद साहू को 3 वोट से हराया है।