महुआ के प्रसंस्करण केंद्रों में चल रहे कई प्रयोग

रायपुर। प्राकृतिक सौंदर्य से परिपूर्ण बस्तर के प्राकृतिक खाद्यान्न (ऑर्गेनिक फूड) भी देश-विदेशों में काफी फेमस हैं। खासकर बस्तर बियर के नाम से मशहूर सल्फी पेड़ का रस, चापड़ा चटनी और महुआ की बनी शराब का स्वाद बस्तर घूमने आने वाले लोग जरूर चखते हैं। महुआ से सेहतमंद आरटीएस कोल्ड्रिंग्स, जूस, लड्डू और सात अन्य सेहतमंद खाद्य सामग्रियां तैयार की जा रही है। इसके अलावा महुआ, मशरुम और जामुन से बिस्किट्स बनाने शोध किया जा रहा है। वनोपज और फलों से बने खाद्य सामग्री अब लोगों को चुस्त-दुरुस्त और फीट रखने में काफी फायदेमंद साबित होगी।

वन धन केन्द्र राजनांदगांव के अंतर्गत महुआ प्रसंस्करण केन्द्र का शुभारंभ दिसंबर 2019 में किया गया था। जहां ताजे महुआ के कल्प से महुआ आरटीएस कोल्ड्रिंग्स महुआ का जूस एवं शरबत, महुआ में तिल, फल्लीदाना, ड्राय फूड तथा गुड मिलाकर लड्डू तैयार किया जा रहा है, जो काफी स्वादष्टि एवं पौष्टिक है। महुआ में फल्लीदाना एवं गुड मिलाकर महुआ चिक्की, जैम तैयार किया जा रहा है। महुआ में इमली, सौफ, हींग, काली मिर्च मिलाकर स्वादिष्ट एवं चटपटी महुआ चटनी भी बनाई जा रही है। पके महुआ फूल को सूखाने के बाद उसके जीरे से सीलबंद पैकेट में महुआ ड्राई बनाया जा रहा है, जिसे देशी किशमिश की तरह उपयोग किया जा सकता है, जो काफी अधिक पौष्टिक माना जाता है।
बीमारियों से मिलेगी राहत
महुआ प्रसंस्करण केन्द्र के प्रभारी एमएल बंजारे एवं सहायक प्रभारी दीपक सोनी ने बताया कि ये उत्पाद कई बीमारी दूर करने में लाभकारी है। शुगर, बीपी मरीजों, गर्भवती महिलाओं और बच्चों में कुपोषण दूर करने इसका उपयोग कर सकते हैं। इस यूनिट से रोजगार की संभावना बढ़ी है।

महुआ सेनेटाईजर की विदेशों में मांग

जशपुर जिले के महुआ सेनेटाइजर की महक अब विदेशों तक पहुंच चुकी है। सेनिटाइजर का उपयोग अब विदेशों में भी लोग करने लगे हैं। विगत वर्ष कोरोना संक्रमण की शुरुआत दौर में वनमण्डलाधिकारी अधिकारी श्रीकृष्ण जाधव और युवा वैज्ञानिक समर्थ जैन के सार्थक प्रयास से सैिनटाइजर निर्माण की अप्रैल माह 2020 में शुरुआत की गई और संकट की इस घड़ी में सेनेटाइजर लोगों के लिए कारगर अविष्कार साबित हुआ। जशपुर जिले का नाम राज्य से लेकर देशभर में होने लगा और प्रदेश के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के साथ सभी जनप्रतिनिधियों ने खुलकर जशपुर जिले की प्रशंसा की गई। ट्रायफेड द्वारा अब विदेशों से भी बड़ी संख्या में सैनिटाइजर की मांग की जा रही है। जशपुर से बने उत्पाद दिल्ली ट्रायफेड के राष्ट्रीय कार्यशाला में भेजा गया और कार्यालय में इसकी गुणवत्ता हर्बल युक्त केमिकल मुक्त की भी जानकारी दी गई। शुद्धता के कारण इसकी मांग विदेशों से बडी संख्या में की जा रही है।

महुआ फूलों का निर्यात

एपीडा ने कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पादों की निर्यात क्षमता को बढ़ावा देने के लिए छत्तीसगढ़ से निर्जलित महुआ फूलों की एक खेप छत्तीसगढ़ से फ्रांस को समुद्र के रास्ते निर्यात की गई। महुआ के फूल घने, छोटे आकार और पीले सफेद रंग के होते हैं। इसके फूलों से कस्तूरी जैसी सुगंध आती है। जो मार्च और अप्रैल के महीने में आते हैं। महुआ के फूलों को सुखाकर खाने और अन्य में कई रूपों में प्रयोग किया जाता है. इसके साथ ही महुआ के निर्जलित फूलों का उपयोग शराब, दवा और सिरप बनाने के लिए किया जाता है।

महुआ टी भी फायदेमंद

आज के समय में लोग अपनी एनर्जी बढ़ाने और मोटापा कम करने के लिए ग्रीन टी पी रहे हैं, लेकिन अब एक और चाय देश के साथ विदेशों में भी चर्चा बटोरने वाली है. ये चाय है बस्तर की जंगली महुआ टी। बस्तर फूड की संचालक रजिया शेख का दावा है कि आसानी से बनने वाली इस महुआ टी से ना सिर्फ थकान मिटती है, बल्कि इम्यूनिटी भी बूस्ट होती है।

Courtesy: https://twitter.com/apedadoc/status/1425698373617676292?s=24