ISRO को मिले दो नए लॉन्चपैड, चंद्रयान-4 की तैयारी जोरों पर

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) अपने लॉन्च क्षमताओं का विस्तार करने जा रहा है। इसरो के अध्यक्ष वी. नारायणन ने पुष्टि की है कि दो नए लॉन्चपैड तैयार किए जा रहे हैं। इनमें से एक श्रीहरिकोटा, आंध्र प्रदेश में और दूसरा कुलसेकरपट्टिनम, तमिलनाडु में स्थापित होगा। ये लॉन्चपैड अगले दो वर्षों में पूरी तरह से तैयार हो जाएंगे और इसरो की लॉन्च प्रोफाइल को और मजबूत करेंगे।

चंद्रयान-4 मिशन: 2028 में ऐतिहासिक लॉन्च

इसरो ने चंद्रयान-4 मिशन की भी घोषणा की है, जो 2028 में लॉन्च होगा। यह मिशन चंद्रयान-3 की तुलना में काफी उन्नत होगा। चंद्रयान-3 का वजन 4,000 किलोग्राम था, लेकिन चंद्रयान-4 का वजन 9,200 किलोग्राम होगा और इसमें दो मॉड्यूल अंतरिक्ष में डॉक किए जाएंगे। इस मिशन का प्रमुख उद्देश्य चंद्रमा पर लैंडिंग कर वहां से सैंपल लाना होगा, जिससे भारत की अंतरिक्ष खोज में एक बड़ी उपलब्धि जुड़ जाएगी।

ISRO के अंतरराष्ट्रीय सहयोग और नई उपलब्धियां

🔹 ISRO और NASA मिलकर NISAR (नासा-इसरो सिंथेटिक अपर्चर रडार) सैटेलाइट विकसित कर रहे हैं। इसे GSLV मार्क II रॉकेट के जरिए लॉन्च किया जाएगा। यह सैटेलाइट पृथ्वी के पर्यावरणीय बदलावों का अध्ययन करेगा।

🔹 पिछले 10 वर्षों में इसरो ने 433 उपग्रहों को 34 देशों के लिए सफलतापूर्वक लॉन्च किया है। इसरो प्रमुख ने बताया कि इनमें से 90% उपग्रह भारतीय रॉकेट से भारतीय धरती से लॉन्च किए गए हैं। इसरो G-20 सैटेलाइट डिजाइन कर रहा है, जिसका 40% पेलोड भारत में विकसित किया जाएगा। यह उपग्रह जलवायु अध्ययन में सहायक होगा।

ISRO में महिला वैज्ञानिकों की अहम भूमिका

इसरो अध्यक्ष ने लैंगिक समावेशिता (Gender Inclusivity) पर जोर देते हुए कहा कि महिलाओं को समान अवसर दिए जा रहे हैं। चंद्रयान और मंगलयान मिशनों में महिलाओं की प्रमुख भूमिका रही है, जिससे इसरो की प्रतिभा आधारित पहचान को बल मिला है।

आने वाले मिशन और इसरो की भविष्य की योजनाएं

इसरो का लक्ष्य अंतरिक्ष अनुसंधान को किफायती और आम जनता के लिए उपयोगी बनाना है।
सूर्य अध्ययन से जुड़े डाटा को सार्वजनिक किया जाएगा।
अंतरिक्ष विज्ञान में भारत की वैश्विक स्थिति को और मजबूत किया जाएगा।