छत्तीसगढ़ में प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाएं आज अचानक ठप हो गईं, क्योंकि राज्यभर की मितानिनों ने 7 जुलाई से अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी है।

इस आंदोलन की शुरुआत राजधानी रायपुर के तुता क्षेत्र से हुई, जहां सैकड़ों मितानिनें अपने अधिकारों की मांग को लेकर एकत्रित हुईं।

📌 क्यों कर रहीं हैं मितानिनें विरोध?

मितानिनों का कहना है कि उन्हें स्वास्थ्य मिशन के तहत स्थायी व्यवस्था में शामिल नहीं किया गया है।
इसके अलावा, उन्हें जो प्रोत्साहन राशि मिलती है, वह पर्याप्त नहीं है और सरकार द्वारा वादा की गई 50% बढ़ोतरी अब तक नहीं दी गई।

वे यह भी मांग कर रही हैं कि ब्लॉक समन्वयकों, प्रशिक्षकों और हेल्प डेस्क कर्मियों को हर माह निश्चित वेतन मिले।

⚠️ स्वास्थ्य सेवाओं पर बड़ा असर

इस हड़ताल से गर्भवती महिलाओं की जांच, टीकाकरण अभियान, नवजातों की देखभाल, टीबी व कुष्ठ रोगियों को दवा वितरण जैसे अहम कार्य ठप हो गए हैं।

गांवों में स्वास्थ्य सेवाओं की रीढ़ मानी जाने वाली मितानिनों की अनुपस्थिति ने ग्रामीण इलाकों में चिकित्सा संकट खड़ा कर दिया है।

🔎 सरकार की चुप्पी और आंदोलन का भविष्य

अब तक सरकार की ओर से कोई ठोस जवाब नहीं आया है। मितानिनों का कहना है कि जब तक उनकी 9 सूत्रीय मांगों पर निर्णय नहीं लिया जाएगा, तब तक यह आंदोलन जारी रहेगा।

यदि यह विरोध लंबा खिंचता है, तो छत्तीसगढ़ के दूरस्थ क्षेत्रों में जनस्वास्थ्य व्यवस्था पूरी तरह ठप हो सकती है।