छत्तीसगढ़ के शराब घोटाले में ईडी ने एक और बड़ा दावा किया है। चैतन्य बघेल मनी लॉन्ड्रिंग मामले में रायपुर की विशेष अदालत में पेश किए गए। ईडी के अनुसार, उन्होंने 16.70 करोड़ रुपये की अवैध नकदी प्राप्त की थी।
अब यह दावा किया गया कि इन पैसों को रियल एस्टेट कंपनियों के माध्यम से वैध दिखाने की कोशिश की गई। इस रकम से फ्लैट बुकिंग, निर्माण और अन्य बैंकिंग एंट्री की गई। इससे पहले पांच दिन की रिमांड में पूछताछ हो चुकी है।
ईडी ने दावा किया कि इस नकदी का संबंध शराब सिंडिकेट से था। यह भी सामने आया कि चैतन्य बघेल ने त्रिलोक सिंह ढिल्लों के साथ ‘विठ्ठलपुरम प्रोजेक्ट’ में फर्जी फ्लैट खरीदी का दिखावा किया। इसके माध्यम से 5 करोड़ रुपये अप्रत्यक्ष रूप से लिए गए।
मामले में बैंक ट्रांजैक्शन की ट्रेल भी ईडी के पास है। यह आरोप लगाया गया कि शराब सिंडिकेट की रकम इन्हीं खातों में पहुंची। जांच में इस नेटवर्क के अन्य सदस्यों पर भी नजर रखी जा रही है।
ईडी के अनुसार, चैतन्य बघेल ने 1000 करोड़ से अधिक की पीओसी (अपराध से अर्जित संपत्ति) को संभालने और ट्रांसफर करने में भी भूमिका निभाई। यह धनराशि कांग्रेस पार्टी के कोषाध्यक्ष के माध्यम से पार्टी और बघेल परिवार के करीबियों तक पहुंचाई गई।
ईडी की जांच अभी जारी है, और आगे और भी बड़े खुलासे संभव हैं। चैतन्य बघेल की भूमिका को लेकर सियासी हलकों में हलचल है, और अब नजर कोर्ट के आगामी फैसले पर है।
