मालेगांव विस्फोट कोर्ट निर्णय आज सभी के लिए चौंकाने वाला रहा क्योंकि सभी सात आरोपी बरी कर दिए गए हैं।
एनआईए की विशेष अदालत ने यह कहते हुए फैसला सुनाया कि सबूत अपर्याप्त थे और जांच त्रुटिपूर्ण रही।
विस्फोट की पृष्ठभूमि
2008 में रमजान और नवरात्रि के दौरान मालेगांव के व्यस्त इलाके में विस्फोट हुआ था।
इस विस्फोट में छह लोगों की मौत और सौ से ज्यादा लोग घायल हुए थे।
कोर्ट की टिप्पणी
जज ने कहा कि न तो घटनास्थल से फिंगरप्रिंट इकट्ठा किए गए और न ही कोई पुख्ता तकनीकी साक्ष्य मिला।
साथ ही, यूएपीए लगाने के लिए आवश्यक वैधानिक अनुमति भी नहीं ली गई थी।
जांच में क्या गड़बड़ी हुई?
कोर्ट ने यह भी बताया कि मेडिकल सर्टिफिकेट में बदलाव किए गए और घायलों की उम्र को गलत दर्ज किया गया।
बम रखने की पुष्टि नहीं हो पाई, जिससे सभी आरोपी संदेह का लाभ पाकर बरी हुए।
आरोपी और प्रक्रिया
इस मामले में साध्वी प्रज्ञा ठाकुर, सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट कर्नल प्रसाद पुरोहित, मेजर रमेश उपाध्याय सहित सात लोग शामिल थे।
कोर्ट ने 19 अप्रैल को फैसला सुरक्षित रखा था और 31 जुलाई को सुनाया गया।
ऐतिहासिक संदर्भ
यह मामला महाराष्ट्र एटीएस के तत्कालीन प्रमुख शहीद हेमंत करकरे की शुरुआती जांच के कारण भी चर्चित रहा।
12 लोगों पर आरोप तय हुए थे, लेकिन समय के साथ केवल सात आरोपी ही बच पाए।
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