भारत के पूर्व रिजर्व बैंक गवर्नर उर्जित पटेल को अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) में एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर की जिम्मेदारी मिली है। केंद्र सरकार ने इस नियुक्ति को मंजूरी दी है और उनका कार्यकाल तीन वर्षों का होगा। वे भारत, बांग्लादेश, श्रीलंका और भूटान का प्रतिनिधित्व करेंगे।

IMF में नई जिम्मेदारी

IMF का कार्यकारी बोर्ड 25 निदेशकों से मिलकर बना है। उर्जित पटेल की नियुक्ति भारत की वैश्विक आर्थिक स्थिति को मजबूती देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

AIIB में कार्य और अनुभव

इससे पहले पटेल एशियन इंफ्रास्ट्रक्चर इंवेस्टमेंट बैंक (AIIB) में निवेश संचालन के उपाध्यक्ष रहे। जनवरी 2024 में उन्होंने पारिवारिक कारणों से इस पद से इस्तीफा दे दिया था।

आरबीआई गवर्नर का सफर

2016 में रघुराम राजन के बाद उन्हें 24वां आरबीआई गवर्नर नियुक्त किया गया। दिसंबर 2018 में सरकार और केंद्रीय बैंक के बीच लाभांश हस्तांतरण को लेकर विवाद बढ़ा और उन्होंने इस्तीफा दे दिया। इसके बावजूद उनके योगदान ने भारतीय अर्थव्यवस्था को स्थिरता दी।

शिक्षा और करियर की शुरुआत

1963 में जन्मे पटेल ने लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स से स्नातक और ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय से एमफिल की उपाधि प्राप्त की। 1990 में उन्होंने येल विश्वविद्यालय से अर्थशास्त्र में पीएचडी पूरी की। इसके बाद उन्होंने IMF में काम किया और कई देशों में सेवाएं दीं।

अन्य योगदान

उर्जित पटेल ने वित्त मंत्रालय में सलाहकार की भूमिका निभाई और निजी क्षेत्र की कंपनियों जैसे रिलायंस इंडस्ट्रीज, IDFC और गुजरात राज्य पेट्रोलियम निगम में भी काम किया। उनका अनुभव उन्हें एक प्रभावशाली अर्थशास्त्री बनाता है।