बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के चर्चित शराब घोटाले मामले में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल को बिलासपुर हाईकोर्ट से फिर निराशा हाथ लगी है। कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका को खारिज कर दिया, जिससे अब उनकी गिरफ्तारी की आशंका और बढ़ गई है।

चैतन्य बघेल ने एसीबी (भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो) द्वारा संभावित गिरफ्तारी से बचने के लिए यह याचिका दायर की थी। इससे पहले एसीबी कोर्ट और हाईकोर्ट में उनकी याचिकाएँ खारिज हो चुकी हैं। अब लगातार तीसरी बार उन्हें राहत नहीं मिल पाई।

मामले में राज्य सरकार की ओर से सीनियर एडवोकेट महेश जेठमलानी और एडिशनल एडवोकेट जनरल विवेक शर्मा ने दलील दी कि यह गंभीर अपराध है और इससे शासन को करोड़ों रुपये का नुकसान पहुँचा है। कोर्ट ने तर्कों को उचित मानते हुए जमानत अर्जी ठुकरा दी।

इसके अलावा, चैतन्य बघेल ने प्रवर्तन निदेशालय (ED) की एफआईआर और कार्रवाई को भी चुनौती दी है। कई दिनों तक चली सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने इस पर अपना आदेश सुरक्षित रख लिया है। ईडी की ओर से अधिवक्ता डॉ. सौरभ पांडेय ने कोर्ट में कहा कि चैतन्य की भूमिका इस घोटाले में स्पष्ट है और उनकी गिरफ्तारी पूरी तरह कानूनी प्रक्रिया के तहत हुई है।

इस पूरे घटनाक्रम ने न केवल चैतन्य बघेल की मुश्किलें बढ़ा दी हैं बल्कि छत्तीसगढ़ की राजनीति में भी हलचल और तेज हो गई है।