संसद का शीतकालीन सत्र 2025 पहले ही दिन गरमाया हुआ दिखाई दिया। जैसे ही कार्यवाही शुरु हुई, विपक्ष ने एसआईआर मुद्दे को लेकर तीखा विरोध दर्ज कराया, जिसके कारण सदन में भारी शोरगुल और नारेबाजी होने लगी। स्थिति नियंत्रण से बाहर होती देख लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को सदन की कार्यवाही दोपहर 12 बजे तक स्थगित करनी पड़ी। कुल 19 दिनों के इस सत्र में 15 बैठकें प्रस्तावित हैं, लेकिन प्रारम्भिक दिन राजनीतिक संघर्ष का मंच बन गया।

राज्यसभा में पहली बार सभापति के रूप में उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने कार्यवाही का संचालन किया। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने उनकी नेतृत्व क्षमता और समाज सेवा को सम्मान देते हुए कहा कि आम किसान परिवार से उठकर राष्ट्र नेतृत्व के पद तक पहुंचना सांसदों के लिए प्रेरणा का बड़ा स्रोत है।

सदन में बढ़ते हंगामे के बीच पीएम मोदी ने सभी दलों से आग्रह किया कि संसद को चुनावी रणभूमि न बनाया जाए। उन्होंने कहा कि “लोकतंत्र में जोर नारे पर नहीं, नीतियों और समाधान पर होना चाहिए। यहां ड्रामा नहीं, डिलीवरी होनी चाहिए।” उन्होंने चिंता व्यक्त की कि लगातार हंगामे और नारेबाजी के कारण युवा सांसद, खासकर पहली बार चुने गए सदस्य, अपने क्षेत्रों से जुड़े मुद्दों पर बोलने का मौका खो देते हैं।

इसी बीच कांग्रेस सांसद गुरजीत सिंह औजला ने कहा कि इस सत्र का सबसे बड़ा विषय वोटों की कथित हेराफेरी और चुनाव प्रणाली की पारदर्शिता रहेगा। विपक्ष ने यह भी संकेत दिया कि सरकार को इस मुद्दे पर स्पष्ट जवाब देना होगा। वहीं प्रधानमंत्री ने सांसदों से आग्रह किया कि राजनीति में मतभेद रहने के बावजूद राष्ट्रहित और सदन की गरिमा हमेशा श्रेष्ठता पर होनी चाहिए।