वीर सावरकर पुरस्कार को लेकर चल रहा विवाद अब और गहराता दिखाई दे रहा है। कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने स्पष्ट रूप से कहा है कि वह वी.डी. सावरकर के नाम पर दिया जाने वाला कोई भी सम्मान स्वीकार नहीं करेंगे। उनकी प्रतिक्रिया तब सामने आई जब आयोजकों ने बिना अनुमति उनके नाम की घोषणा कर दी, जिसे थरूर ने “गैरजिम्मेदाराना” बताया।

दिल्ली में मीडिया से चर्चा करते हुए थरूर ने कहा कि उन्हें इस पुरस्कार के बारे में अंतिम समय में पता चला और वे समारोह में शामिल नहीं होंगे। थरूर का कहना है कि आयोजकों ने न तो उनसे आधिकारिक सहमति ली और न ही आवश्यक जानकारी साझा की, जिससे यह पूरा मामला और गंभीर बन गया।

दूसरी ओर, एचआरडीएस इंडिया ने पलटवार करते हुए कहा है कि थरूर को पहले ही विस्तार से जानकारी दे दी गई थी। संस्था ने दावा किया कि पुरस्कार जूरी और संगठन प्रतिनिधि उनके आवास पर भी मिले थे और उन्होंने अन्य पुरस्कार विजेताओं की सूची तक मांगी थी। संगठन का आरोप है कि थरूर कांग्रेस के राजनीतिक दबाव में पीछे हट रहे हैं।

थरूर ने ‘X’ पर यह भी लिखा कि पुरस्कार, उसके उद्देश्य और आयोजन की पारदर्शिता के अभाव में वह इसे स्वीकार नहीं कर सकते। उन्होंने कहा कि यह नामांकन उन्हें मीडिया रिपोर्टों से पता चला, जो कि प्रक्रिया की गंभीर खामियों को उजागर करता है।

कांग्रेस नेता मुरलीधरन ने भी बयान देते हुए कहा कि किसी भी कांग्रेस सदस्य के लिए सावरकर के नाम का पुरस्कार स्वीकार करना उचित नहीं है, क्योंकि सावरकर के ब्रिटिश शासन से जुड़े ऐतिहासिक विवादों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

यह पूरा मामला अब राजनीतिक बहस का बड़ा मुद्दा बन चुका है, जहां एक ओर पारदर्शिता पर सवाल उठ रहे हैं, वहीं दूसरी ओर पार्टी और विचारधारा की राजनीति भी चरम पर है।