छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में शुक्रवार को उस समय स्थिति तनावपूर्ण हो गई, जब शहर के व्यस्त और प्रमुख मार्गों से गौवंश की ‘अंतिम यात्रा’ निकाले जाने की सूचना प्रशासन को मिली। प्रशासन ने इसे बिना पूर्व अनुमति निकाला जा रहा आयोजन बताते हुए तत्काल रोक लगा दी। कार्रवाई के दौरान पुलिस और आयोजक पक्ष के समर्थकों के बीच हल्की झड़प भी देखने को मिली।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, इस अंतिम यात्रा का आयोजन राजनीत चौहान द्वारा किया जा रहा था। यात्रा में गौवंश के शव को सार्वजनिक सड़कों से ले जाने की योजना थी, जिसे प्रशासन ने कानून-व्यवस्था के लिए खतरा माना। सूचना मिलते ही पुलिस बल मौके पर पहुंचा और स्थिति को नियंत्रित करने की कोशिश की। इसी दौरान आयोजकों के समर्थकों ने विरोध जताया, जिससे मौके पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया।

पुलिस ने हालात को बिगड़ने से रोकने के लिए सख्त रुख अपनाते हुए आयोजक समेत कई लोगों को हिरासत में ले लिया। इसके बाद गौवंश के शव को जुलूस मार्ग से हटाकर नियमानुसार आगे की प्रक्रिया शुरू की गई। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि सार्वजनिक स्थलों पर इस प्रकार के आयोजन के लिए प्रशासनिक अनुमति अनिवार्य होती है, जिसका पालन नहीं किया गया था।

प्रशासन का कहना है कि ऐसी यात्राओं से यातायात व्यवस्था प्रभावित होती है और संवेदनशील मुद्दों के कारण सामाजिक तनाव भी बढ़ सकता है। इसलिए समय रहते हस्तक्षेप करना आवश्यक था। फिलहाल हिरासत में लिए गए लोगों से पूछताछ की जा रही है और पूरे घटनाक्रम की जांच जारी है।

दूसरी ओर, आयोजक पक्ष का कहना है कि उनका उद्देश्य धार्मिक भावना और गौवंश के प्रति सम्मान प्रकट करना था, न कि किसी प्रकार की अव्यवस्था फैलाना। घटना के बाद रायपुर में कानून-व्यवस्था, धार्मिक आयोजनों और प्रशासनिक अनुमति को लेकर नई बहस छिड़ गई है।