बांग्लादेश में जारी राजनीतिक अस्थिरता अब गंभीर हिंसा का रूप लेती जा रही है, जिसका असर पड़ोसी भारत में भी साफ नजर आने लगा है। अपदस्थ प्रधानमंत्री शेख हसीना के विरोधी नेता उस्मान हादी की मौत के बाद बांग्लादेश के कई इलाकों में उग्र प्रदर्शन भड़क उठे। हालात इतने बिगड़ गए कि अराजक तत्वों ने न सिर्फ राजनीतिक दलों, बल्कि मीडिया संस्थानों को भी निशाना बनाया।

गुरुवार देर रात बांग्लादेश के सबसे बड़े समाचार पत्र डेली स्टार और प्रोथोम अलो के कार्यालयों में आगजनी की गई। इसके साथ ही शेख हसीना की पार्टी अवामी लीग के दफ्तरों को भी जला दिया गया। इससे पहले भी सरकार विरोधी हिंसा के दौरान अवामी लीग के कार्यालयों पर हमले हो चुके हैं, जिससे यह साफ होता है कि देश में कानून-व्यवस्था की स्थिति लगातार बिगड़ रही है।

इसी बीच एक हिंदू युवक की मॉब लिंचिंग की घटना ने हालात को और अधिक संवेदनशील बना दिया है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, भालुका इलाके में दीपू चंद्र दास नामक युवक को ईशनिंदा के आरोप में अराजक भीड़ ने पीट-पीटकर मार डाला। आरोप है कि इसके बाद शव को नग्न कर पेड़ से लटकाया गया और आग लगा दी गई। इस दिल दहला देने वाली घटना के वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं, जिसने बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता पैदा कर दी है।

बांग्लादेश में कुछ प्रदर्शनकारियों द्वारा भारत के उत्तर-पूर्वी राज्यों पर दावा जताने वाले बयानों के बाद भारत में भी आक्रोश देखने को मिला। खासकर त्रिपुरा में लोगों ने बांग्लादेश के कट्टरपंथी तत्वों और वहां जारी अराजकता के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किए। राजधानी अगरतला में बांग्लादेश उप-उच्चायुक्त कार्यालय के बाहर टिपरा मोथा पार्टी की यूथ विंग ने प्रदर्शन कर भारत विरोधी बयानबाजी पर कड़ी नाराजगी जाहिर की।

प्रदर्शनकारियों ने बांग्लादेश की अंतरिम सरकार पर हिंसा रोकने में नाकाम रहने का आरोप लगाया और कहा कि ऐसी घटनाएं पूरे क्षेत्र की शांति के लिए खतरा हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि हालात पर जल्द काबू नहीं पाया गया, तो इसका असर भारत-बांग्लादेश संबंधों पर भी पड़ सकता है। मौजूदा हालात में क्षेत्रीय स्थिरता बनाए रखने के लिए कूटनीतिक प्रयास और सख्त कदम बेहद जरूरी हो गए हैं।