बांग्लादेश के मयमनसिंह जिले में हुई हिंसक घटना ने एक बार फिर देश में मॉब हिंसा और अल्पसंख्यक सुरक्षा के मुद्दे को केंद्र में ला दिया है। वालुका क्षेत्र में रहने वाले 27 वर्षीय हिंदू युवक दीपू चंद्र दास की बेरहमी से हत्या के मामले में सुरक्षा एजेंसियों ने बड़ी सफलता हासिल की है। रैपिड एक्शन बटालियन (RAB) ने इस जघन्य अपराध में शामिल सात आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है।

इस कार्रवाई की जानकारी अंतरिम सरकार के मुख्य सलाहकार मोहम्मद यूनुस ने दी। उन्होंने बताया कि सभी आरोपियों से पूछताछ जारी है और जांच को हर कोण से आगे बढ़ाया जा रहा है ताकि घटना के पीछे की साजिश और अन्य संभावित संलिप्त लोगों का भी खुलासा हो सके।

भीड़ हिंसा पर सरकार की दो टूक

मोहम्मद यूनुस ने सोशल मीडिया के माध्यम से साफ शब्दों में कहा कि सरकार कानून-व्यवस्था बनाए रखने और दोषियों को सजा दिलाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने चेतावनी दी कि किसी भी तरह की सांप्रदायिक नफरत, उकसावे और भीड़ द्वारा हिंसा को बांग्लादेश में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

यूनुस ने इस हत्याकांड को मानवता के विरुद्ध अपराध बताते हुए कहा कि ऐसी घटनाएं समाज में डर और अस्थिरता फैलाने का प्रयास हैं, जिन्हें सरकार सफल नहीं होने देगी।

‘नए बांग्लादेश’ में हिंसा की कोई जगह नहीं

अंतरिम सरकार द्वारा जारी आधिकारिक बयान में कहा गया कि नए बांग्लादेश की परिकल्पना शांति, सह-अस्तित्व और कानून के शासन पर आधारित है। बयान में स्पष्ट किया गया कि हत्या, आगजनी, धमकी और संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वालों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी।

बांग्ला ट्रिब्यून की रिपोर्ट के अनुसार, यह घटना कथित ईशनिंदा के आरोपों के बाद हुई, जिसके बाद उग्र भीड़ ने युवक को निशाना बनाया और हत्या के बाद शव को आग लगा दी। इस अमानवीय कृत्य की देश-विदेश में कड़ी आलोचना हो रही है।

शांति बनाए रखने की अपील

मुख्य सलाहकार की मीडिया टीम ने नागरिकों से अपील की है कि वे अफवाहों से दूर रहें और हिंसा, नफरत व उकसावे को अस्वीकार करें। सरकार ने भरोसा दिलाया है कि पीड़ित परिवार को पूरा न्याय दिलाया जाएगा।