पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान के लिए कानूनी संकट लगातार गहराता जा रहा है। तोशाखाना मामले से जुड़े ताजा फैसले में एक विशेष अदालत ने इमरान खान और उनकी पत्नी बुशरा बीबी को 17-17 साल की जेल की सजा सुनाई है। इस फैसले ने न केवल पाकिस्तान की राजनीति में हलचल मचा दी है, बल्कि सत्ता में रहते हुए मिले उपहारों की जवाबदेही को लेकर भी बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है।
यह फैसला संघीय जांच एजेंसी (FIA) की विशेष अदालत ने रावलपिंडी स्थित अदियाला जेल में सुनाया, जहां इमरान खान पहले से ही कई मामलों में बंद हैं।
तोशाखाना क्या है और इसका कानून क्या कहता है?
पाकिस्तान में विदेशी राष्ट्राध्यक्षों, शासकों या अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधियों से मिलने वाले सभी उपहार राज्य की संपत्ति माने जाते हैं। इन्हें सरकार की आधिकारिक डिपॉजिटरी यानी तोशाखाना में जमा करना अनिवार्य होता है।
यदि कोई प्रधानमंत्री या राष्ट्रपति इन उपहारों को निजी रूप से अपने पास रखना चाहता है, तो उसे सरकारी मूल्यांकन के अनुसार राशि अदा करनी होती है। इसके बाद ही उपहार को वैध रूप से खरीदा जा सकता है। तोशाखाना में रखे गए उपहारों की नीलामी से प्राप्त धन सीधे राष्ट्रीय खजाने में जाता है।
इमरान खान पर क्या आरोप लगे?
जांच एजेंसियों के अनुसार, 2018 में प्रधानमंत्री बनने के बाद इमरान खान को विदेशी दौरों के दौरान करीब 14 करोड़ रुपये मूल्य के 58 कीमती उपहार मिले थे। इनमें सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान द्वारा भेंट किया गया बुलगारी ज्वैलरी सेट सबसे चर्चित रहा।
आरोप है कि इमरान खान ने इन उपहारों को तोशाखाना से बेहद कम कीमत पर खरीदा और बाद में बाजार में बेचकर लाखों रुपये का निजी लाभ कमाया। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, 2.15 करोड़ रुपये देकर खरीदे गए इन गिफ्ट्स से उन्होंने करीब 5.8 करोड़ रुपये का मुनाफा कमाया।
मामला कैसे उजागर हुआ?
इमरान खान के सत्ता से हटने के बाद सत्तारूढ़ गठबंधन के सांसदों ने नेशनल असेंबली के स्पीकर के सामने शिकायत दर्ज कराई। आरोप था कि इमरान खान ने तोशाखाना से जुड़े उपहारों की पूरी जानकारी छिपाई और संपत्ति विवरण में गलत तथ्य प्रस्तुत किए।
जांच के बाद चुनाव आयोग और अन्य एजेंसियों ने आरोपों को सही पाया। इसके चलते इमरान खान की संसद सदस्यता रद्द कर दी गई और उन्हें संविधान के अनुच्छेद 63(1)(P) के तहत अयोग्य घोषित किया गया।
सजा और जुर्माना क्यों हुआ इतना सख्त?
अदालत ने इमरान खान को भ्रष्टाचार और धोखाधड़ी से जुड़ी अलग-अलग धाराओं में 10 साल और 7 साल, यानी कुल 17 साल की सजा सुनाई। बुशरा बीबी को भी समान सजा दी गई है। साथ ही दोनों पर 1.6 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया गया है, जिसे न चुकाने पर सजा और बढ़ सकती है।
इमरान खान का पक्ष क्या है?
इमरान खान का कहना है कि ये उपहार उन्हें निजी तौर पर मिले थे, इसलिए उन्हें रखने का पूरा अधिकार था। हालांकि, अदालत ने इस दलील को स्वीकार नहीं किया। बाद में इमरान खान ने पूरे मामले को राजनीतिक साजिश करार दिया।
आगे क्या होगा?
कानूनी विशेषज्ञों के मुताबिक, इमरान खान इस फैसले को हाईकोर्ट या सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दे सकते हैं। लेकिन फिलहाल यह मामला पाकिस्तान की राजनीति में जवाबदेही और सत्ता के दुरुपयोग का सबसे बड़ा उदाहरण बन चुका है।
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