प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की हालिया कार्रवाइयों ने पश्चिम बंगाल की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है। इस मुद्दे पर राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल ने केंद्र सरकार पर तीखा प्रहार करते हुए कहा कि जांच एजेंसियों का इस्तेमाल अब निष्पक्ष जांच के बजाय राजनीतिक हथियार के रूप में किया जा रहा है।
कपिल सिब्बल का कहना है कि जैसे ही चुनाव का समय नजदीक आता है, ईडी और अन्य केंद्रीय एजेंसियों को अचानक पुराने मामलों के दस्तावेज याद आने लगते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि इसका मुख्य उद्देश्य विपक्षी नेताओं को मानसिक और राजनीतिक रूप से परेशान करना है। पश्चिम बंगाल का हवाला देते हुए सिब्बल ने कहा कि जहां भाजपा चुनावी रूप से मजबूत नहीं है, वहां ममता बनर्जी और तृणमूल कांग्रेस को निशाना बनाया जा रहा है।
उन्होंने ईडी की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि किसी एक मामले की जांच के नाम पर पूरे कार्यालय की फाइलें जब्त करना न तो संवैधानिक है और न ही कानूनी रूप से उचित। यदि जांच कोयला घोटाले से जुड़ी है, तो केवल उससे संबंधित दस्तावेज लिए जाने चाहिए, न कि हर फाइल।
सिब्बल ने यह भी पूछा कि वर्षों से लंबित मामलों में चुनाव के दौरान ही अचानक तेजी क्यों आ जाती है। उन्होंने कहा कि कोयला घोटाला कोई नया विषय नहीं है, फिर भी कार्रवाई का समय संदेह पैदा करता है। यूपीए सरकार के कार्यकाल को याद करते हुए उन्होंने कहा कि उस दौर में जांच एजेंसियों को राजनीतिक दबाव में काम नहीं करना पड़ता था और बिना ठोस सबूत के किसी को निशाना नहीं बनाया जाता था।
कपिल सिब्बल ने चेतावनी दी कि ईडी की बढ़ती भूमिका देश की संघीय व्यवस्था के लिए खतरा बनती जा रही है। उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्यों के बीच जानबूझकर टकराव बढ़ाया जा रहा है, जिससे लोकतांत्रिक संतुलन कमजोर हो रहा है।
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