केंद्र सरकार द्वारा मनरेगा योजना को हटाकर नई VB-G RAM-G योजना लाने के फैसले ने राजनीतिक माहौल गर्म कर दिया है। कांग्रेस का आरोप है कि यह कदम ग्रामीण गरीबों के रोजगार और मजदूरी के अधिकारों को कमजोर करने की दिशा में उठाया गया है।
इस विरोध में कांग्रेस ने 10 जनवरी से ‘मनरेगा बचाओ संग्राम’ की शुरुआत की। पार्टी के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने बताया कि यह आंदोलन देश की लगभग 2.5 लाख ग्राम पंचायतों तक पहुंचेगा और इसमें करोड़ों ग्रामीण लोग शामिल होंगे। यह अभियान ग्रामीण रोजगार, मजदूरी और जवाबदेही के अधिकारों को बहाल करने की मांग करता है।
कांग्रेस ने इस संग्राम के लिए एक समन्वय समिति गठित की है। इसके संयोजक अजय माकन हैं, जबकि जयराम रमेश, संदीप दीक्षित और प्रियंक खरगे जैसे वरिष्ठ नेता इसके सदस्य हैं। संग्राम 10 जनवरी से 25 फरवरी तक चलेगा और इसे जन आंदोलन के रूप में विकसित किया जाएगा।
अभियान को ऑनलाइन भी सशक्त किया गया है। लोग वेबसाइट पर जाकर याचिका पर हस्ताक्षर कर सकते हैं, जो राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को भेजी जाएगी। कांग्रेस की प्रमुख मांगें हैं:
मनरेगा में काम की गारंटी बहाल करना
न्यूनतम मजदूरी 400 रुपये प्रतिदिन तय करना
पंचायतों को अधिक अधिकार देना
योजना की मूल भावना और उद्देश्य की रक्षा
साथ ही, ‘काम मांगो अभियान’ भी शुरू किया गया है। इसके तहत कम से कम 10 मजदूर अपने जॉब कार्ड लेकर ग्राम पंचायत कार्यालय जाएंगे और काम की मांग करेंगे। अगर 15 दिनों में काम नहीं मिलता, तो वे बेरोजगारी भत्ता के लिए ब्लॉक स्तर पर आवेदन कर सकेंगे।
कांग्रेस का यह अभियान ग्रामीण गरीबों के अधिकारों और सम्मान की रक्षा के लिए एक देशव्यापी संघर्ष बन चुका है।
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