आगरा स्थित विश्व प्रसिद्ध ताजमहल एक बार फिर सूफियाना परंपरा और ऐतिहासिक विरासत का साक्षी बन रहा है। मुगल बादशाह शाहजहां का 371वां तीन दिवसीय उर्स बृहस्पतिवार से श्रद्धा और रस्मों के साथ आरंभ हो गया है। इस अवसर पर देश-विदेश से आने वाले पर्यटक और जायरीन शाहजहां व मुमताज महल की असली कब्रों के दर्शन कर सकेंगे।

उर्स की शुरुआत दोपहर 2 बजे अजान के साथ मजारों के द्वार खोले जाने से हुई। पहले दिन गुस्ल की रस्म अदा की गई, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए। उर्स कमेटी के अनुसार 15 से 17 जनवरी 2026 तक ताजमहल में पर्यटकों का प्रवेश निशुल्क रखा गया है, जिससे आम लोगों को इस ऐतिहासिक आयोजन में शामिल होने का अवसर मिल सके।

16 जनवरी को दरगाह परिसर में संदल शरीफ, गुलपोशी और फातिहा की रस्में होंगी। इसके साथ ही कव्वालों द्वारा सूफियाना कव्वाली और मुशायरे का आयोजन किया जाएगा। वहीं उर्स के अंतिम दिन यानी 17 जनवरी को पूरे दिन कुरान खानी और चादरपोशी का सिलसिला चलेगा। इस दिन ताजमहल सुबह से शाम तक सभी के लिए मुफ्त रहेगा।

इस बार उर्स की एक विशेष झलक हिंदुस्तान की सबसे लंबी सतरंगी चादर का जुलूस होगा। 1620 मीटर लंबी यह चादर हनुमान मंदिर सिद्दी गेट से होते हुए ताजमहल परिसर में लाई जाएगी। जुलूस में कई विशिष्ट अतिथि और उर्स कमेटी के पदाधिकारी भी शामिल रहेंगे।

व्यवस्था और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए वॉलिंटियरों की ड्यूटी लगाई गई है। प्रशासन ने सभी पर्यटकों से अपील की है कि वे ताजमहल परिसर में किसी भी तरह की प्रतिबंधित वस्तु न लाएं। धूम्रपान और लाठी-डंडा पूरी तरह वर्जित रहेगा, ताकि आयोजन शांतिपूर्ण और सुव्यवस्थित ढंग से संपन्न हो सके।