वैश्विक ऊर्जा बाजार इन दिनों गहरे तनाव से गुजर रहा है। ईरान से जुड़े हालिया घटनाक्रमों के बीच Strait of Hormuz में उत्पन्न व्यवधान को लेकर अमेरिका की बड़ी तेल कंपनियों ने Donald Trump प्रशासन को गंभीर चेतावनी दी है।

रिपोर्ट के मुताबिक यदि इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग में रुकावट लंबे समय तक बनी रहती है, तो इसका असर केवल कच्चे तेल तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पेट्रोल, डीजल और अन्य रिफाइंड उत्पादों की वैश्विक आपूर्ति पर भी पड़ सकता है।

दिग्गज तेल कंपनियों ने जताई गहरी चिंता

मीडिया रिपोर्ट, जिसमें The Wall Street Journal का हवाला दिया गया है, के अनुसार व्हाइट हाउस में हुई चर्चाओं के दौरान ऊर्जा बाजार की अस्थिरता को लेकर प्रमुख तेल कंपनियों ने अपनी चिंता जाहिर की।

इस बैठक में ExxonMobil, Chevron और ConocoPhillips के शीर्ष अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि होर्मुज में व्यवधान का असर वैश्विक सप्लाई चेन पर पड़ सकता है।

एक्सॉन के सीईओ डैरेन वुड्स ने चेताया कि यदि बाजार में सट्टेबाजी बढ़ती है तो कच्चे तेल की कीमतें मौजूदा स्तर से काफी ऊपर जा सकती हैं। साथ ही रिफाइंड ईंधन की कमी की स्थिति भी बन सकती है।

अमेरिकी उत्पादन से पूरी नहीं होगी कमी

तेल उद्योग के विशेषज्ञों का कहना है कि अमेरिका घरेलू उत्पादन बढ़ाकर इस संकट की भरपाई करने की स्थिति में नहीं है।

होर्मुज जलडमरूमध्य से प्रतिदिन लगभग 90 लाख से 1 करोड़ बैरल तेल की आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका है, जिसकी पूर्ति करना आसान नहीं होगा।

इसका असर बाजार पर भी दिखाई देने लगा है। अमेरिकी कच्चे तेल की कीमत कुछ ही दिनों में लगभग 87 डॉलर प्रति बैरल से बढ़कर 99 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई।

ट्रंप ने कई देशों से मांगा सहयोग

स्थिति को संभालने के लिए राष्ट्रपति Donald Trump ने कई देशों से समुद्री सुरक्षा के लिए सहयोग मांगा है। उन्होंने संकेत दिया कि इस क्षेत्र में जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए एक अंतरराष्ट्रीय गठबंधन बनाने की कोशिश की जा रही है।

ट्रंप का कहना है कि पश्चिम एशिया के तेल पर अधिक निर्भर देशों को इस मार्ग की सुरक्षा में आगे आना चाहिए। उदाहरण के तौर पर China अपनी लगभग 90 प्रतिशत तेल आपूर्ति इसी मार्ग से प्राप्त करता है।

क्यों अहम है होर्मुज जलडमरूमध्य

Strait of Hormuz, जो Iran और Oman के बीच स्थित है, दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री ऊर्जा मार्गों में से एक है।

हर दिन करीब 2 करोड़ बैरल से अधिक कच्चा तेल इसी रास्ते से गुजरता है, जो वैश्विक तेल खपत का लगभग 20 प्रतिशत है। इसके अलावा बड़ी मात्रा में LNG (तरलीकृत प्राकृतिक गैस) की ढुलाई भी इसी मार्ग से होती है।

यही वजह है कि इस जलडमरूमध्य में किसी भी प्रकार का तनाव वैश्विक ऊर्जा बाजार, वित्तीय बाजार और आम उपभोक्ताओं के बजट तक को प्रभावित कर सकता है।