भारत की जनगणना 2027 का पहला चरण एक अप्रैल से प्रारंभ हो गया है। यह जनगणना कई मायनों में महत्वपूर्ण है, क्योंकि इसे पहली बार पूर्णतः डिजिटल माध्यम से संचालित किया जा रहा है।
दो चरणों में प्रक्रिया
जनगणना को दो प्रमुख चरणों में विभाजित किया गया है। पहले चरण में भवन सूचीकरण और आवास जनगणना शामिल है, जिसमें घरों की संरचना, सुविधाएं और परिसंपत्तियों से संबंधित जानकारी एकत्र की जाएगी। यह चरण विभिन्न राज्यों में अलग-अलग तिथियों के अनुसार संचालित होगा।
दूसरे चरण में फरवरी 2027 के दौरान जनसंख्या गणना की जाएगी, जिसमें प्रत्येक व्यक्ति से सामाजिक, आर्थिक, शैक्षणिक और प्रवासन संबंधी जानकारी ली जाएगी। इस चरण में जातिगत डेटा संग्रह भी शामिल होगा।
डिजिटल परिवर्तन
इस बार कागजी फॉर्म का उपयोग समाप्त कर दिया गया है। गणनाकर्ता मोबाइल एप के माध्यम से सीधे डेटा दर्ज करेंगे। साथ ही नागरिकों को ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से स्वयं जानकारी भरने की सुविधा दी गई है।
राज्यवार कार्यक्रम
अलग-अलग राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए भवन सूचीकरण की तिथियां निर्धारित की गई हैं। उदाहरणस्वरूप, कुछ राज्यों में यह प्रक्रिया अप्रैल के मध्य से शुरू होगी, जबकि अन्य में मई के दौरान संचालित होगी।
संदर्भ तिथि और विशेष प्रावधान
जनगणना की सामान्य संदर्भ तिथि 1 मार्च 2027 निर्धारित की गई है। हालांकि, पर्वतीय और विशेष क्षेत्रों जैसे जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के लिए यह तिथि 1 अक्टूबर 2026 रखी गई है।
नीतिगत महत्व
यह डिजिटल जनगणना भविष्य की नीतियों, संसाधन आवंटन और सामाजिक योजनाओं के निर्धारण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
