पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य पर बढ़ते खतरे ने वैश्विक ऊर्जा सप्लाई को प्रभावित कर दिया है। ईरान और अमेरिका-इस्राइल के बीच जारी संघर्ष के चलते यह अहम समुद्री मार्ग अस्थिर बना हुआ है, जिससे तेल और गैस की आपूर्ति पर दबाव बढ़ गया है।
इस स्थिति को देखते हुए खाड़ी देश अब “प्लान-B” पर तेजी से काम कर रहे हैं। संयुक्त अरब अमीरात, सऊदी अरब, बहरीन और कुवैत जैसे देश होर्मुज पर निर्भरता कम करने के लिए वैकल्पिक मार्गों और पाइपलाइन नेटवर्क पर विचार कर रहे हैं।
अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने भी संकेत दिया है कि ईरान में सैन्य लक्ष्य पूरे होने तक संघर्ष जारी रह सकता है, जिससे यह संकट और लंबा खिंचने की आशंका है।
क्यों जरूरी हुआ होर्मुज का विकल्प?
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे अहम तेल मार्गों में से एक है, लेकिन मौजूदा संघर्ष के कारण यह अत्यंत संवेदनशील हो गया है। ईरान द्वारा टैंकरों को निशाना बनाने और आवाजाही पर नियंत्रण की खबरों ने खाड़ी देशों को वैकल्पिक रास्ते खोजने के लिए मजबूर कर दिया है।
किन विकल्पों पर काम कर रहे हैं खाड़ी देश?
- सऊदी अरब की ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन
सऊदी अरब अपनी 1,200 किमी लंबी ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन की क्षमता बढ़ाने की योजना बना रहा है, जिससे तेल को सीधे लाल सागर के यनबू बंदरगाह तक पहुंचाया जा सके और होर्मुज को बायपास किया जा सके। - IMEC कॉरिडोर (भारत-मध्य पूर्व-यूरोप)
सबसे अहम विकल्प India-Middle East-Europe Economic Corridor (IMEC) को माना जा रहा है। यह कॉरिडोर भारत को खाड़ी देशों के जरिए यूरोप से जोड़ने का एक बड़ा नेटवर्क है, जिसमें रेल, सड़क, बंदरगाह और पाइपलाइन शामिल होंगे। - यूएई की फूजैरह पाइपलाइन
यूएई अपनी हबशान-फूजैरह पाइपलाइन की क्षमता बढ़ाने और एक नई लाइन विकसित करने पर विचार कर रहा है, जिससे तेल सीधे ओमान की खाड़ी तक पहुंच सके। - इराक-तुर्किये मार्ग
इराक से तुर्किये के सेहान बंदरगाह तक जाने वाली पाइपलाइन और नए क्रॉस-बॉर्डर मार्गों पर भी चर्चा हो रही है, हालांकि ये काफी महंगे और जोखिम भरे विकल्प हैं। - लाल सागर पर नए टर्मिनल
सऊदी अरब लाल सागर के तट पर नए निर्यात टर्मिनल विकसित करने की योजना बना रहा है, जिससे वैकल्पिक निर्यात क्षमता बढ़ाई जा सके।
भारत के लिए क्यों अहम है IMEC?
IMEC परियोजना की घोषणा 2023 में जी20 शिखर सम्मेलन के दौरान की गई थी, जिसमें Narendra Modi ने अहम भूमिका निभाई थी। यह कॉरिडोर भारत को सीधे मध्य पूर्व और यूरोप से जोड़कर व्यापार, ऊर्जा और लॉजिस्टिक्स के क्षेत्र में बड़ा लाभ दे सकता है।
इसके जरिए भारत को सस्ता और सुरक्षित ऊर्जा आपूर्ति मार्ग मिल सकता है, साथ ही वैश्विक सप्लाई चेन में उसकी भूमिका और मजबूत होगी।
क्या हैं चुनौतियां?
हालांकि इन परियोजनाओं को लागू करना आसान नहीं है। पाइपलाइन और टर्मिनल बनाना बेहद महंगा और समय लेने वाला है। इसके अलावा, क्षेत्रीय राजनीति—खासकर सऊदी अरब और इस्राइल के संबंध—भी इस योजना में बड़ी बाधा बन सकते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि IMEC जैसे प्रोजेक्ट लंबी अवधि में होर्मुज पर निर्भरता कम करने का मजबूत विकल्प बन सकते हैं, लेकिन फिलहाल इसके लिए कूटनीतिक सहमति और भारी निवेश की जरूरत होगी।
