नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत के साथ स्कूल शिक्षा में पुस्तक लागत एक प्रमुख मुद्दा बनकर उभरा है। Central Board of Secondary Education से संबद्ध निजी विद्यालयों में अभिभावकों को महंगे पुस्तक सेट खरीदने पड़ रहे हैं।
कीमतों में असमानता
एनसीईआरटी द्वारा प्रकाशित पुस्तकों की कीमत अपेक्षाकृत कम होती है, जबकि निजी प्रकाशकों की किताबें कई गुना अधिक मूल्य पर उपलब्ध होती हैं। यह अंतर विभिन्न कक्षाओं में स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है, जहां सैकड़ों रुपये की किताबें हजारों रुपये के सेट में परिवर्तित हो जाती हैं।
वितरण प्रणाली और बाध्यता
कई विद्यालय एकल विक्रेता के माध्यम से किताबों की आपूर्ति सुनिश्चित करते हैं। इससे अभिभावकों के पास विकल्प सीमित हो जाते हैं और वे प्रतिस्पर्धात्मक मूल्य का लाभ नहीं उठा पाते।
अनावश्यक अध्ययन सामग्री
जानकारी के अनुसार, पुस्तक सेट में शामिल लगभग 30 प्रतिशत सामग्री ऐसी होती है, जिसका उपयोग सीमित या नगण्य होता है। इसके बावजूद इन्हें अनिवार्य रूप से खरीदना पड़ता है।
प्रशासनिक दृष्टिकोण
जिला शिक्षा अधिकारी हिमांशु भारतीय ने स्पष्ट किया है कि किसी भी अभिभावक को विशेष दुकान से खरीदारी के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता।
निष्कर्ष
वर्तमान परिदृश्य यह दर्शाता है कि शिक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और मूल्य नियंत्रण की आवश्यकता है, जिससे अभिभावकों पर आर्थिक दबाव कम किया जा सके।
