15 अप्रैल 2026 को आयोजित छत्तीसगढ़ मंत्रिपरिषद की बैठक में बहु-आयामी नीतिगत निर्णय लिए गए, जिनका प्रभाव शासन व्यवस्था, सामाजिक संरचना और आर्थिक गतिविधियों पर व्यापक रूप से पड़ेगा।
समान नागरिक संहिता की दिशा में राज्य ने प्रारंभिक कदम उठाते हुए एक विशेषज्ञ समिति के गठन का निर्णय लिया है। यह समिति विभिन्न व्यक्तिगत कानूनों के स्थान पर एक समान कानूनी ढांचा तैयार करने के लिए सुझाव संकलित करेगी। संविधान के अनुच्छेद 44 के अनुरूप यह पहल न्यायिक प्रक्रिया को सरल और एकरूप बनाने की दिशा में देखी जा रही है।
महिला संपत्ति अधिकारों को सुदृढ़ करने के लिए भूमि पंजीयन शुल्क में 50 प्रतिशत की छूट का निर्णय महत्वपूर्ण है। इससे संपत्ति स्वामित्व में लैंगिक संतुलन बढ़ाने की संभावना है।
रक्षा सेवाओं से जुड़े व्यक्तियों के लिए स्टाम्प शुल्क में 25 प्रतिशत की छूट प्रदान करना पुनर्वास और आर्थिक स्थिरता के संदर्भ में एक सहायक कदम माना जा सकता है।
औद्योगिक नीति में संशोधन करते हुए भूमि आवंटन और वित्तीय संस्थानों की भागीदारी को स्पष्ट किया गया है। इससे निवेश वातावरण को अधिक अनुकूल बनाने का प्रयास किया गया है।
खनन क्षेत्र में व्यापक सुधारों के तहत अवैध गतिविधियों पर नियंत्रण और राजस्व वृद्धि के लिए कड़े प्रावधान लागू किए गए हैं। निष्क्रिय खदानों को सक्रिय करने तथा दंडात्मक प्रावधानों को सख्त बनाने पर जोर दिया गया है।
रेत खनन में सार्वजनिक उपक्रमों की भागीदारी सुनिश्चित करने से आपूर्ति बाधाओं को दूर करने की संभावना जताई गई है।
पशुपालन क्षेत्र में टीकों की समय पर उपलब्धता सुनिश्चित करने हेतु वैकल्पिक खरीद व्यवस्था लागू की गई है, जिससे उत्पादन और पशु स्वास्थ्य पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।
अंततः, पेंशन दायित्वों के पुनर्संतुलन के तहत वित्तीय समायोजन को स्वीकृति दी गई, जिससे राज्य की वित्तीय पारदर्शिता को मजबूती मिलेगी।
