महाराष्ट्र के नासिक स्थित Tata Consultancy Services (TCS) कार्यालय में सामने आए यौन उत्पीड़न और कथित जबरन धर्मांतरण के मामले ने नया मोड़ ले लिया है। इस केस की मुख्य आरोपी निदा खान, जो फिलहाल फरार बताई जा रही है, ने अदालत में अग्रिम जमानत के लिए आवेदन किया है। उसके परिवार ने दावा किया है कि वह मुंबई में है और गर्भवती है, हालांकि पुलिस इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि करने में जुटी है।

जांच से जुड़े अधिकारियों के अनुसार, विशेष जांच दल (SIT) लगातार छापेमारी कर रही है और फरार आरोपियों की तलाश तेज कर दी गई है। माना जा रहा है कि आरोपी मेडिकल आधार का हवाला देकर गिरफ्तारी से राहत पाने की कोशिश कर रही है। इस बीच, TCS प्रबंधन ने आरोपों की गंभीरता को देखते हुए निदा खान को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है और उसके सभी आधिकारिक अधिकार वापस ले लिए हैं।

मामले पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री Devendra Fadnavis ने इसे “सुनियोजित और संगठित मॉड्यूल” का हिस्सा बताया है। उन्होंने कहा कि शुरुआती जांच में यह संकेत मिल रहे हैं कि घटनाएं एक पैटर्न के तहत अंजाम दी गईं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इस संवेदनशील मामले की जानकारी केंद्रीय एजेंसियों को भी दे दी गई है और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

पुलिस के मुताबिक, अब तक नौ शिकायतें दर्ज की जा चुकी हैं, जिनमें महिला कर्मचारियों ने यौन उत्पीड़न, मानसिक प्रताड़ना और पीछा करने जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं। जांच में यह भी सामने आया है कि कुछ मामलों में कर्मचारियों पर धार्मिक गतिविधियों का दबाव बनाया गया। इस मामले में सात आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है, जिनमें एक महिला एचआर अधिकारी भी शामिल है।

पीड़ितों का आरोप है कि उन्होंने कंपनी के भीतर शिकायत दर्ज कराई थी, लेकिन समय पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। इस बीच Tata Sons के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन ने पूरे मामले को गंभीर और चिंताजनक बताया है। कंपनी ने COO आरती सुब्रमण्यम के नेतृत्व में आंतरिक जांच शुरू कर दी है और “जीरो टॉलरेंस” नीति के तहत दोषियों पर कार्रवाई का भरोसा दिया है।

यह मामला न केवल कॉर्पोरेट कार्यस्थलों में सुरक्षा और जवाबदेही पर सवाल खड़े कर रहा है, बल्कि संगठित अपराध और संस्थागत लापरवाही की संभावनाओं को भी उजागर कर रहा है। फिलहाल जांच एजेंसियां हर पहलू की गहन पड़ताल कर रही हैं।