कांग्रेस सांसद Jairam Ramesh ने महिला आरक्षण कानून को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार महिला सशक्तिकरण के नाम पर असल में परिसीमन की राजनीति को आगे बढ़ाने की कोशिश कर रही है। उनके मुताबिक संसद के हालिया विशेष सत्र में जो घटनाक्रम सामने आए, वे केवल विधायी प्रक्रिया नहीं बल्कि एक बड़े राजनीतिक एजेंडे की ओर इशारा करते हैं।
जयराम रमेश ने कहा कि Nari Shakti Vandan Adhiniyam को सितंबर 2023 में सर्वसम्मति से पारित किया गया था, लेकिन इसे लागू करने में लंबे समय तक देरी की गई। उन्होंने सवाल उठाया कि 16 अप्रैल की रात अचानक इसकी अधिसूचना जारी करने की क्या जरूरत थी। उनके अनुसार, इस फैसले के पीछे राजनीतिक समय-निर्धारण और रणनीतिक उद्देश्य हो सकते हैं, जिन्हें स्पष्ट किया जाना चाहिए।
उन्होंने लोकसभा की संरचना को लेकर भी चिंता जताई। रमेश के मुताबिक मौजूदा 543 सीटों के संदर्भ में यह स्पष्ट नहीं है कि भविष्य में राज्यों के प्रतिनिधित्व को कैसे संतुलित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि भले ही सरकार की ओर से आश्वासन दिए गए हों, लेकिन विधेयक में इनका स्पष्ट उल्लेख न होना पारदर्शिता पर सवाल खड़ा करता है।
Indian National Congress के इस वरिष्ठ नेता ने जातिगत जनगणना को लेकर भी केंद्र सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि सरकार इस मुद्दे पर स्पष्ट रोडमैप देने से बच रही है, जबकि यह सामाजिक न्याय और नीति निर्माण के लिए बेहद अहम है। साथ ही, असम और जम्मू-कश्मीर में हुए परिसीमन का हवाला देते हुए उन्होंने इसे विवादास्पद और अविश्वसनीय बताया।
जयराम रमेश ने सवाल किया कि यदि सरकार वास्तव में पारदर्शी है, तो वह जातिगत जनगणना और परिसीमन की प्रक्रिया को स्पष्ट रूप से सामने क्यों नहीं रख रही। उनके अनुसार, जब तक इन मुद्दों पर स्पष्टता नहीं आती, तब तक सरकार की नीयत पर भरोसा करना मुश्किल रहेगा।
