छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा प्रस्तावित “सामाजिक सुरक्षा संहिता (छत्तीसगढ़) नियम, 2026” राज्य के श्रम ढांचे में एक व्यापक नीतिगत बदलाव का संकेत देता है। इस संहिता का उद्देश्य गिग एवं प्लेटफॉर्म आधारित कार्यबल को विधिक मान्यता प्रदान करते हुए उन्हें सामाजिक सुरक्षा तंत्र से जोड़ना है। वर्तमान आर्थिक परिदृश्य में डिजिटल प्लेटफॉर्म आधारित रोजगार में वृद्धि हुई है, परंतु इस वर्ग के श्रमिकों के लिए स्पष्ट कानूनी संरचना का अभाव रहा है।

इस प्रस्तावित कानून में पहली बार “गिग वर्कर” और “प्लेटफॉर्म वर्कर” की विधिक परिभाषा निर्धारित की गई है। इससे इन श्रमिकों की पहचान सुनिश्चित होगी और उन्हें विभिन्न सामाजिक सुरक्षा योजनाओं में शामिल करने का आधार मिलेगा। यह पहल श्रम बाजार के अनौपचारिक और औपचारिक क्षेत्रों के बीच की खाई को कम करने का प्रयास भी मानी जा रही है।

संहिता के अंतर्गत राज्य स्तर पर एक समर्पित सामाजिक सुरक्षा कोष स्थापित किया जाएगा। इसमें एग्रीगेटर कंपनियों द्वारा 1 से 2 प्रतिशत तक का वित्तीय योगदान अनिवार्य किया जाएगा। यह कोष बीमा, पेंशन, मातृत्व लाभ और अन्य सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के संचालन के लिए उपयोग किया जाएगा। इसके साथ ही, एक बहु-हितधारक सामाजिक सुरक्षा मंडल का गठन प्रस्तावित है, जो नीति क्रियान्वयन और निगरानी का कार्य करेगा।

पंजीकरण और सेवा वितरण के लिए डिजिटल अवसंरचना को प्राथमिकता दी गई है। आधार आधारित पंजीकरण प्रणाली और एकल खिड़की पोर्टल के माध्यम से श्रमिकों को सरल और पारदर्शी सेवाएं उपलब्ध कराने का प्रावधान किया गया है। यह व्यवस्था प्रशासनिक दक्षता और डेटा प्रबंधन में सुधार लाने में सहायक होगी।

यह कानून श्रम क्षेत्र के विभिन्न मौजूदा अधिनियमों को एकीकृत करते हुए एक समग्र ढांचा प्रस्तुत करता है। इससे नीतिगत स्पष्टता और क्रियान्वयन में एकरूपता आएगी। समग्र रूप से, यह पहल राज्य में श्रम सुधारों के एक नए चरण की शुरुआत का संकेत देती है, जो डिजिटल अर्थव्यवस्था के अनुरूप श्रम नीतियों को अद्यतन करने की दिशा में महत्वपूर्ण है।