पिछले ढाई साल से एक फार्मूला जनता से लेकर नेताओं तक को परेशान किया हुआ है, और वो फॉर्मूला है ढाई-ढाई साल के मुख्यमंत्री पद का फॉर्मूला।

इस फॉर्मूले के मुताबिक इसी साल के 17 जुलाई से मुख्यमंत्री के तौर पर भूपेश बघेल का कार्यकाल समाप्त हो गया, जिसके बाद छत्तीसगढ़ कांग्रेस में नम्बर 2 के कद्दावर नेता कहे जाने वाले स्वास्थ्य मंत्री TS सिंहदेव को मुख्यमंत्री पद सौपे जाने की बारी है। लेकिन इसमें अब भी सियासी मचा हुआ है। 6 मंत्रियों समेत करीब 50 से ज्यादा विधायक दिल्ली में डेरा डाले हुए हैं।

तो क्या सच निकला ढाई-ढाई साल का फॉर्मूला ?

बीजेपी को भी डर

भूपेश बघेल के पास वर्तमान में पर्याप्त समर्थन है और कहीं न कहीं सिंहदेव पिछड़ते हुए दिख रहे हैं। सीएम बघेल किसान और पिछड़ा वर्ग का चेहरा बन चुके हैं। वो छत्तीसगढिया चेहरा हैं इसके कारण उनका अपने साथी मंत्रियों के साथ सम्मानपू्र्वक व्यवहार है।
सीएम भूपेश की नीति प्रदेश और पार्टी के लिए गेम चेंजर साबित हुई है। सूत्रों की मानें तो बीजेपी भी सीएम भूपेश की बढ़ती लोकप्रियता से डर रही है।

पार्टी के भविष्य की चिंता

सरगुजा महाराजा टीएस सिंहदेव, को विधायकों ने छोड़ दिया है। क्योंकि उन्हें विश्वास है कि उनके नेतृत्व में, कांग्रेस राजनीतिक रूप से अप्रासंगिक हो जाएगी। वे अपने स्वयं के राजनीतिक भविष्य के साथ-साथ छत्तीसगढ़ राज्य में पार्टी के भविष्य से भी डरे हुए हैं।