छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर इन दिनों गहरे पेयजल संकट से जूझ रही है। शहर के कई इलाकों में पानी की कमी ने आम जनजीवन को प्रभावित कर दिया है। इस मुद्दे को लेकर आम आदमी पार्टी (AAP) ने सरकार और नगर निगम पर गंभीर आरोप लगाते हुए इसे प्रशासनिक विफलता बताया है।
पार्टी नेताओं ने प्रेस वार्ता में कहा कि राजधानी के कई वार्डों में हालात बेहद चिंताजनक हो चुके हैं। चंगोराभाटा, रायपुरा, मोवा, पंडरी, शक्ति नगर और दलदल सिवनी जैसे क्षेत्रों में लोग रोजमर्रा की जरूरतों के लिए भी पानी को तरस रहे हैं। कई जगहों पर 10 से 15 दिनों तक नियमित जल आपूर्ति नहीं होने की शिकायत सामने आई है, जिससे नागरिकों को टैंकरों पर निर्भर रहना पड़ रहा है।
AAP ने दावा किया कि खम्हारडीह जैसे घनी आबादी वाले इलाकों में हजारों लोग इस संकट से प्रभावित हैं। वहीं कचना, सड्डू और जीडीए कॉलोनी जैसे क्षेत्रों में लगातार कई दिनों से पानी की आपूर्ति बाधित है। शहर के कई हिस्सों में नलों में लो-प्रेशर की समस्या भी बनी हुई है, जिससे स्थिति और खराब हो गई है। हालात ऐसे हैं कि पानी के टैंकर पहुंचते ही लोगों की भीड़ उमड़ पड़ती है।
पार्टी ने इस संकट को केवल मौसमी समस्या नहीं, बल्कि वर्षों से चली आ रही प्रशासनिक लापरवाही का परिणाम बताया है। AAP नेताओं का कहना है कि चाहे भाजपा की सरकार रही हो या कांग्रेस की, किसी ने भी इस मूलभूत समस्या का स्थायी समाधान नहीं किया। इसका खामियाजा अब आम जनता को भुगतना पड़ रहा है।
इसके साथ ही पार्टी ने नगर निगम और शासन से कई सवाल भी उठाए हैं। उन्होंने पूछा कि आखिर हर साल गर्मियों में जल संकट की पुनरावृत्ति क्यों होती है? जनता को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने के लिए ठोस योजना क्यों नहीं बनाई गई? और इस विफलता के लिए जिम्मेदार कौन है?
AAP ने साफ कहा है कि यदि जल्द ही इस समस्या का समाधान नहीं किया गया, तो पार्टी प्रभावित नागरिकों के साथ मिलकर बड़े स्तर पर आंदोलन करेगी और रायपुर नगर निगम का घेराव करेगी। पार्टी ने इसे जनता के अधिकारों की लड़ाई बताते हुए कहा कि अब चुप रहने का समय खत्म हो चुका है।
