Bengal Health Department

पश्चिम बंगाल में स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर सरकार ने बड़ा प्रशासनिक कदम उठाया है। Bengal Health Department ने कोलकाता मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल के पूर्व अधीक्षक डॉ. अंजन अधिकारी के खिलाफ विभागीय जांच के आदेश जारी किए हैं। उन पर गंभीर लापरवाही, प्रशासनिक खामियों और कर्तव्य में चूक के आरोप लगाए गए हैं।

सरकारी अधिकारियों के मुताबिक, यह आदेश मंगलवार रात जारी किया गया। वहीं जांच शुरू होने के बाद राज्य के स्वास्थ्य विभाग में हलचल तेज हो गई है। इससे पहले डॉ. अंजन अधिकारी को उनके पद से हटाकर रायगंज सरकारी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में स्थानांतरित कर दिया गया था।

क्या हैं पूरे मामले के आरोप?

दरअसल, Bengal Health Department को लगातार शिकायतें मिल रही थीं कि सरकारी अस्पतालों में मरीजों को अनावश्यक रूप से दूसरे अस्पतालों में रेफर किया जा रहा है। इसके अलावा अस्पतालों में दलाल गिरोहों की सक्रियता को लेकर भी गंभीर आरोप सामने आए थे।

स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि कलकत्ता मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में कार्यरत रहते हुए डॉ. अधिकारी प्रशासनिक व्यवस्था को बेहतर ढंग से संभालने में असफल रहे। इसलिए उनके खिलाफ विभागीय जांच शुरू करने का फैसला लिया गया।

क्यों अहम है यह कार्रवाई?

कलकत्ता मेडिकल कॉलेज देश का सबसे पुराना मेडिकल कॉलेज और अस्पताल माना जाता है। इसकी स्थापना 28 जनवरी 1835 को हुई थी। ऐसे में यहां सामने आए आरोपों ने सरकार की चिंता बढ़ा दी है। इसी बीच Bengal Health Department ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि सरकारी अस्पतालों में लापरवाही किसी भी हालत में बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

इसके अलावा यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि नई सरकार के गठन के बाद यह स्वास्थ्य क्षेत्र में पहली बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई है।

मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने क्या कहा था?

मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने हाल ही में राज्य के सरकारी अस्पतालों में “रेफरल संस्कृति” पर कड़ी नाराजगी जताई थी। उन्होंने अधिकारियों के साथ बैठक में स्पष्ट कहा था कि यदि अस्पतालों में न्यूनतम संख्या में भी बेड उपलब्ध हों, तो मरीजों को भर्ती किया जाना चाहिए।

हालांकि, चेतावनी के बावजूद शिकायतें लगातार सामने आती रहीं। इसके बाद Bengal Health Department ने मामले को गंभीरता से लेते हुए कार्रवाई शुरू कर दी।

आगे क्या हो सकता है?

विशेषज्ञों का मानना है कि Bengal Health Department की यह कार्रवाई राज्य के अन्य सरकारी अस्पतालों के लिए भी बड़ा संदेश है। वहीं विभागीय जांच पूरी होने के बाद डॉ. अंजन अधिकारी के खिलाफ आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।

इसके अलावा सरकार अब अस्पतालों में पारदर्शिता और मरीजों की सुविधा सुनिश्चित करने पर ज्यादा फोकस करती नजर आ रही है। इसलिए आने वाले दिनों में स्वास्थ्य विभाग की ओर से और सख्त फैसले देखने को मिल सकते हैं।

यह भी पढ़ें: Annapurna Yojana Bengal: महिलाओं को हर महीने ₹3000 का ऐलान
Amazon Future Deal Case में SC का बड़ा फैसला, मिली राहत
Kashmir Terror Network: घाटी में फिर सक्रिय हो रहे आतंकी संगठन