Vikrant Singh

भारतीय ग्रीको रोमन पहलवान Vikrant Singh एक बार फिर विवादों में हैं। Vikrant Singh Doping Case सामने आने के बाद भारतीय कुश्ती जगत में हलचल तेज हो गई है।

जानकारी के मुताबिक डोप टेस्ट में पॉजिटिव पाए जाने के बावजूद विक्रांत सिंह लखनऊ में चल रहे नेशनल कैंप का हिस्सा बने रहे। यही नहीं, उन्होंने एशियाई चैंपियनशिप के ट्रायल में भी भाग लिया।

तीन प्रतिबंधित पदार्थ मिलने से बढ़ी मुश्किलें

Vikrant Singh Doping Case में नाडा की रिपोर्ट ने कई चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। सैंपल जांच में स्टेरॉयड स्टेनोजोलॉल, टैमोक्सीफेन और लैट्रोजोल जैसे प्रतिबंधित पदार्थ पाए गए।

सूत्रों के अनुसार एक से ज्यादा प्रतिबंधित पदार्थ मिलने पर खिलाड़ी पर लंबा प्रतिबंध लगाया जा सकता है। इस मामले में विक्रांत पर आठ साल तक की कार्रवाई संभव मानी जा रही है।

नाडा और WFI के बीच सूचना को लेकर सवाल

National Anti Doping Agency और Wrestling Federation of India के बीच सूचना साझा करने को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।

WFI का कहना है कि उन्हें समय पर जानकारी नहीं मिली। अगर पहले पता चल जाता, तो विक्रांत को तुरंत कैंप से बाहर कर दिया जाता। वहीं Vikrant Singh Doping Case में यह भी सामने आया कि खिलाड़ी ने बी सैंपल टेस्ट की मांग नहीं की।

खेल प्रशासन पर उठे गंभीर सवाल

Vikrant Singh Doping Case ने भारतीय खेल प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी बहस छेड़ दी है। खेल विशेषज्ञों का मानना है कि डोपिंग मामलों में तेज और पारदर्शी कार्रवाई बेहद जरूरी है।

अस्थायी प्रतिबंध लगने के बाद भी खिलाड़ी का कैंप और ट्रायल में हिस्सा लेना नियमों पर सवाल खड़े करता है। इससे भारतीय कुश्ती की छवि पर भी असर पड़ सकता है।


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