संबल का अर्थ जनकल्याण योजना से है। छत्तीसगढ़ सरकार ने राज्य के लाखों श्रमिक परिवारों को इसके तहत लाभ दिलाया है। कल्याणकारी योजना के तहत सभी परिवारों को प्रदान किए जाने वाली सुविधाओं को देखें तो यह पिछले ढाई साल के काम के हिसाब से काफी सराहनीय रहा। छत्तीसगढ़ में चल रही 37 जनकल्याणकारी योजनाओं को संबल में प्रकाशित किया गया है। छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की सरकार प्रदेश में “परहित सरिस धर्म नहिं भाई” के सिद्धांत पर काम कर रही है।

कोरोना संकटकाल में अपनी नैतिक जिम्मेदारियों को निभाते हुए राज्य सरकार का सिर्फ यही मकसद है कि प्रदेशवासियों को किसी प्रकार का कोई कष्ट न हो, विशेषकर गरीब तबके, किसान, दिहाड़ी मजदूर, महिलाओं और विशेष पिछड़े इलाकों के रहवासियों को किसी प्रकार की कोई परेशानी न हो। मुख्यमंत्री की शपथ लेते ही संबंधित विभागों की समीक्षा कर प्रदेशवासियों को हर संभव सुविधायें पिछले पौने तीन साल में उपलब्ध करवाई हैं। अल्प अवधि राजकीय कोष को चौतरफा खोल समाज के प्रत्येक वर्ग को सहायता पहुंचाकर मुख्यमंत्री ने ना केवल उदारता का परिचय दिया बल्कि एक मिसाल कायम कर महानायक के रूप में पुन: अपनी पहचान स्थापित की।

कोरोना काल में किए गए प्रयास

जब कोरोना संक्रमण का असर प्रदेश में बढ़ रहा था, तब मुख्यमंत्री ने प्रदेश के मुखिया की कमान संभाली। उनके सामने यह मुश्किल घड़ी थी, जिसे उन्होंने चुनौती के रूप में स्वीकारते हुए प्रदेश की जनता के हित में निर्णय लिये और उनका क्रियान्वयन भी सुनिश्चित किया। उनके ये प्रयास अभी भी निरंतर जारी हैं। प्रदेश की जनता को कोरोना के संक्रमण से बचाने के लिये मुख्यमंत्री को कुछ ऐसे कठिन निर्णय भी लेने पड़े, जिनसे आमजनता को परेशानी तो महसूस हुई होगी, लेकिन उनका और उनके परिवार का जीवन सुरक्षित रहा। कोरोना का संकट जैसे-जैसे अपने पैर फैला रहा था, सरकार के लिये मुसीबत भी बढ़ती जा रही थी। इन परिस्थितियों से घबराए बिना मुख्यमंत्री ने अपनी प्रशासनिक सूझ-बूझ का परिचय देते हुए प्रदेश को सुरक्षित रखने में अहम् सफलता प्राप्त की। मंत्रिमण्डल के सदस्यों, जनप्रतिनिधियों, धार्मिक गुरूओं और विभागीय अधिकारियों से सतत सम्पर्क बनाकर कोरोना संकट से निपटने की पहल की जाती रही है।

हर तबके से संवाद बनाए रखा

उन्होंने समाज के हर तबके के साथ संवाद बनाये रखा और उनकी समस्याओं को जानकर उनका निराकरण भी किया। प्रदेश के इतिहास में पहली बार किसी मुख्यमंत्री ने संचार की तकनीकों का उपयोग कर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से किसानों, मनरेगा श्रमिकों, पंचायत प्रतिनिधियों, तेंदूपत्ता संग्राहकों, धर्म गुरूओं, संबल योजना के हितग्राहियों, स्वास्थ्य महकमे के अधिकारी, मैदानी स्वास्थ्यकर्मियों, आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं एवं सहायिकाओं सहित उन व्यक्तियों के साथ भी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग की जो चिकित्सालयों से कोरोना से जंग जीत कर वापस आये। प्रदेश की योजनाओं को जमीन पर उतारने के लिय कोई कोर-कसर नहीं छोड़ी। लॉकडाउन के समय कोरोना की एडवायजरी को प्रदेश में सख्ती से लागू किया गया। इसके साथ ही प्रदेश की जनता के लिये विशेष परिस्थितियों में विशेष जरूरतों के अनुरूप कदम उठाते हुए हर वर्ग को आर्थिक सहायता एवं जरूरी आवश्यकतायें उपलब्ध करवाई हैं। इससे एक कदम आगे बढ़ते हुए मुख्यमंत्री ने आत्मनिर्भर प्रदेश निर्माण की दिशा में भी कदम बढ़ाया।