G7 Summit 2026

भारत समेत दुनिया के कई देशों की निगाहें इस समय G7 Summit 2026 पर टिकी हुई हैं। फ्रांस में आयोजित इस शिखर सम्मेलन में वैश्विक सुरक्षा, आर्थिक असंतुलन, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और पश्चिम एशिया की स्थिति जैसे अहम मुद्दों पर चर्चा हो रही है। अमेरिका और ईरान के बीच हालिया समझौते के बाद इस बैठक का महत्व और बढ़ गया है।

G7 Summit 2026 क्यों बना वैश्विक चर्चा का केंद्र?

इस वर्ष का सम्मेलन ऐसे समय आयोजित हो रहा है जब दुनिया कई मोर्चों पर चुनौतियों का सामना कर रही है। रूस-यूक्रेन युद्ध पांचवें वर्ष में प्रवेश कर चुका है, जबकि वैश्विक अर्थव्यवस्था व्यापारिक तनाव और आपूर्ति श्रृंखला की समस्याओं से जूझ रही है।

ईरान-अमेरिका समझौते पर रहेगी नजर

हाल ही में अमेरिका और ईरान के बीच युद्धविराम को लेकर बनी सहमति पर दुनिया की नजर है। G7 Summit 2026 में सदस्य देश इस समझौते के प्रभाव और मध्य पूर्व में स्थिरता की संभावनाओं पर विचार करेंगे।

जी-7 का इतिहास और इसकी अहमियत

जी-7 की स्थापना 1975 में वैश्विक आर्थिक संकट से निपटने के लिए की गई थी। शुरुआत में छह देश शामिल थे, जबकि 1976 में कनाडा के जुड़ने के बाद यह समूह जी-7 बना।

रूस के शामिल होने और बाहर होने की कहानी

1997 में रूस को शामिल कर इसे जी-8 बनाया गया था। हालांकि 2014 में क्रीमिया विवाद के बाद रूस को निलंबित कर दिया गया और समूह फिर से जी-7 बन गया।

सम्मेलन के पांच बड़े एजेंडे

1. रूस-यूक्रेन युद्ध

यूक्रेन को समर्थन देने और युद्ध समाप्ति के संभावित रास्तों पर चर्चा इस सम्मेलन का प्रमुख विषय है।

2. वैश्विक व्यापार और टैरिफ

अमेरिका की व्यापार नीतियों और चीन के बढ़ते आर्थिक प्रभाव को लेकर सदस्य देशों के बीच विस्तृत चर्चा होने की संभावना है।

3. AI के अवसर और खतरे

G7 Summit 2026 में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के बढ़ते प्रभाव, साइबर सुरक्षा और डिजिटल ढांचे को मजबूत बनाने पर भी विशेष सत्र आयोजित किए जा रहे हैं।

4. विकासशील देशों का कर्ज संकट

कई विकासशील देशों पर बढ़ते कर्ज के बोझ को कम करने के उपायों पर भी विचार किया जाएगा।

5. ऊर्जा और आपूर्ति श्रृंखला

ऊर्जा सुरक्षा और वैश्विक सप्लाई चेन को स्थिर बनाए रखने के लिए सदस्य देश साझा रणनीति पर चर्चा करेंगे।

किन नेताओं के साथ ट्रंप का रहा विवाद?

सम्मेलन की एक खास बात यह भी है कि कई सदस्य देशों के नेताओं के साथ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के संबंध पहले से तनावपूर्ण रहे हैं।

ब्रिटेन और कनाडा से मतभेद

ब्रिटिश प्रधानमंत्री किएर स्टार्मर और कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी के साथ ट्रंप के कई सार्वजनिक बयान विवाद का कारण बने थे।

फ्रांस और जर्मनी के साथ भी टकराव

फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों और जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज के साथ भी विदेश नीति और व्यापारिक मुद्दों को लेकर मतभेद सामने आ चुके हैं।

भारत की भागीदारी क्यों महत्वपूर्ण?

हालांकि भारत जी-7 का स्थायी सदस्य नहीं है, लेकिन वैश्विक अर्थव्यवस्था और कूटनीति में उसकी बढ़ती भूमिका को देखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को विशेष अतिथि के रूप में आमंत्रित किया गया है। G7 Summit 2026 में भारत की मौजूदगी वैश्विक दक्षिण की आवाज को मजबूत करने के रूप में देखी जा रही है।

AI और तकनीकी सहयोग पर भारत का फोकस

भारत डिजिटल नवाचार, एआई और वैश्विक आर्थिक साझेदारी से जुड़े मुद्दों पर अपनी प्राथमिकताओं को प्रमुखता से रख सकता है।

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