देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षाओं में शामिल NEET को लेकर छात्रों के बीच प्रतिस्पर्धा लगातार बढ़ रही है। इसी बीच दिल्ली में एक छात्रा की कथित आत्महत्या ने NEET परीक्षा तनाव को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि सफलता की दौड़ में कई छात्र मानसिक दबाव का सामना कर रहे हैं।
दिल्ली की घटना ने झकझोरा
दक्षिण-पश्चिम दिल्ली के पालम इलाके में रहने वाली एक छात्रा ने कथित तौर पर फांसी लगाकर अपनी जान दे दी। शुरुआती जांच में सामने आया है कि वह NEET परीक्षा से जुड़े घटनाक्रमों के बाद मानसिक रूप से परेशान थी।
सुसाइड नोट में झलका दर्द
मौके से मिले नोट में छात्रा ने अपने माता-पिता से माफी मांगते हुए लिखा कि वह उनकी उम्मीदों पर खरी नहीं उतर सकी। इस घटना ने NEET परीक्षा तनाव की गंभीरता को फिर उजागर कर दिया है।
अन्य राज्यों से भी सामने आए मामले
दिल्ली की घटना से पहले राजस्थान के सीकर और उत्तराखंड के देहरादून में भी छात्रों द्वारा आत्महत्या करने के मामले सामने आए थे। इन घटनाओं ने अभिभावकों और शिक्षकों की चिंता बढ़ा दी है।
बढ़ती प्रतिस्पर्धा बन रही चुनौती
विशेषज्ञों का कहना है कि मेडिकल कॉलेजों में सीमित सीटों और कठिन प्रतिस्पर्धा के कारण NEET परीक्षा तनाव लगातार बढ़ रहा है। कई छात्र अपनी अपेक्षाओं और सामाजिक दबाव के बीच संतुलन नहीं बना पाते।
मानसिक स्वास्थ्य को प्राथमिकता देने की जरूरत
मनोवैज्ञानिकों का मानना है कि परीक्षा की तैयारी के दौरान छात्रों को नियमित काउंसलिंग और भावनात्मक सहयोग मिलना चाहिए। मानसिक स्वास्थ्य को नजरअंदाज करना गंभीर परिणाम ला सकता है।
परिवार का सहयोग बेहद महत्वपूर्ण
विशेषज्ञों के अनुसार, माता-पिता को बच्चों की भावनाओं को समझना चाहिए और केवल परिणामों पर ध्यान देने के बजाय उनके प्रयासों की सराहना करनी चाहिए। इससे NEET परीक्षा तनाव को कम करने में मदद मिल सकती है।
NTA ने दी पारदर्शी परीक्षा की गारंटी
राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (NTA) ने छात्रों को भरोसा दिलाया है कि आगामी परीक्षा पूरी तरह निष्पक्ष और सुरक्षित होगी। एजेंसी ने सोशल मीडिया पर फैल रही अफवाहों से दूर रहने की सलाह भी दी है।
फर्जी दावों से बचने की अपील
अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि कुछ लोग परीक्षा पेपर उपलब्ध कराने के नाम पर छात्रों और अभिभावकों को गुमराह कर रहे हैं। ऐसे मामलों से भी NEET परीक्षा तनाव बढ़ सकता है।
समाधान की दिशा में क्या किया जाए?
शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि स्कूलों, कोचिंग संस्थानों और परिवारों को मिलकर छात्रों के लिए सकारात्मक माहौल तैयार करना होगा। सफलता और असफलता को जीवन का अंतिम सत्य नहीं मानने की सोच विकसित करनी होगी।
जागरूकता अभियान की जरूरत
मानसिक स्वास्थ्य और परीक्षा प्रबंधन को लेकर जागरूकता बढ़ाने से छात्रों को बेहतर तरीके से चुनौतियों का सामना करने में मदद मिल सकती है। इससे NEET परीक्षा तनाव के दुष्प्रभावों को कम किया जा सकता है।
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