रायपुर में आयोजित आचार्य पदारोहण एवं सहस्त्रावधान तपस्या महोत्सव में हजारों श्रद्धालुओं की उपस्थिति देखने को मिली। देशभर से पहुंचे संत-साध्वी और समाजजन इस आध्यात्मिक आयोजन का हिस्सा बने। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कार्यक्रम में शामिल होकर जैन संतों का आशीर्वाद लिया। आयोजन ने समाज में आध्यात्मिक जागरूकता और नैतिक मूल्यों के प्रति सम्मान बढ़ाने का कार्य किया, जिससे लोगों में सकारात्मक ऊर्जा का संचार हुआ।
जैन दर्शन विश्व को दे रहा नई दिशा
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा कि जैन दर्शन केवल एक धर्म नहीं बल्कि जीवन जीने की श्रेष्ठ पद्धति है। अहिंसा, सत्य, करुणा और आत्मसंयम जैसे सिद्धांत मानवता को बेहतर दिशा प्रदान करते हैं। उन्होंने कहा कि आज दुनिया में बढ़ती हिंसा और तनाव के बीच भगवान महावीर के विचार वैश्विक शांति का मार्ग दिखा सकते हैं। जैन संतों की साधना और अनुशासन समाज को नैतिक मूल्यों के प्रति जागरूक करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
युवा पीढ़ी के लिए प्रेरणा बने संत
कार्यक्रम में बाल मुनि शतावधानी हंसभद्र मुनि जी महाराज की असाधारण प्रतिभा विशेष आकर्षण का केंद्र रही। मुख्यमंत्री ने कहा कि इतनी कम आयु में ज्ञान और स्मरणशक्ति का ऐसा उदाहरण दुर्लभ है। उनकी साधना युवाओं को अनुशासन, समर्पण और आत्मविकास की प्रेरणा देती है। उन्होंने कहा कि समाज को ऐसे आदर्शों से सीख लेकर सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ना चाहिए ताकि आने वाली पीढ़ियां नैतिक और सांस्कृतिक मूल्यों से जुड़ी रहें।
आध्यात्मिकता से समाज को मिलती है शक्ति
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि आध्यात्मिकता केवल धार्मिक अनुष्ठानों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह समाज को आंतरिक शक्ति प्रदान करती है। उन्होंने कहा कि जैन संतों की शिक्षाएं जीवन में संतुलन और आत्मसंयम का महत्व समझाती हैं। जब व्यक्ति अपने भीतर शांति और सकारात्मकता विकसित करता है, तब समाज और राष्ट्र दोनों मजबूत बनते हैं। ऐसे आयोजन सामाजिक समरसता को बढ़ावा देने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
छत्तीसगढ़ की धरती पर ऐतिहासिक आयोजन
मुख्यमंत्री ने कहा कि यह आयोजन छत्तीसगढ़ की आध्यात्मिक विरासत को नई पहचान देने वाला अवसर है। उन्होंने प्रदेश में शांति, सद्भाव और सांस्कृतिक मूल्यों को बढ़ावा देने की प्रतिबद्धता दोहराई। आयोजन के माध्यम से लोगों को जैन दर्शन की महान परंपराओं से परिचित होने का अवसर मिला। इससे समाज में नैतिक मूल्यों, अनुशासन और आध्यात्मिक चेतना के प्रति जागरूकता बढ़ेगी और सकारात्मक सामाजिक वातावरण को मजबूती मिलेगी।
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