छत्तीसगढ़ सरकार सहकारिता आंदोलन को जनआंदोलन का स्वरूप देने की दिशा में तेजी से काम कर रही है। सहकारिता सप्ताह के आयोजन को लेकर हुई समीक्षा बैठक में मंत्री केदार कश्यप ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि कार्यक्रमों में अधिक से अधिक लोगों की भागीदारी सुनिश्चित की जाए। राज्य के प्रत्येक जिले और विकासखंड तक इस अभियान को पहुँचाने का लक्ष्य रखा गया है।
किसानों और महिलाओं पर रहेगा विशेष ध्यान
मंत्री ने कहा कि सहकारिता आंदोलन का सबसे बड़ा लाभ किसानों, महिला स्व-सहायता समूहों और ग्रामीण समुदायों को मिलता है। इसलिए सप्ताहभर आयोजित कार्यक्रमों में इन वर्गों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी। दुग्ध उत्पादक, मत्स्य पालक, वनोपज संग्राहक और हस्तशिल्पी भी इस अभियान का महत्वपूर्ण हिस्सा होंगे।
जागरूकता और नवाचार को मिलेगी प्राथमिकता
बैठक में अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि सहकारिता आंदोलन से जुड़ी योजनाओं और उपलब्धियों की जानकारी लोगों तक प्रभावी तरीके से पहुंचाई जाए। इसके लिए जागरूकता शिविर, प्रदर्शनी और संवाद कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। नवाचार और सफल मॉडल को भी प्रमुखता से प्रस्तुत किया जाएगा ताकि लोग सहकारिता की ताकत को समझ सकें।
डिजिटल सेवाओं से बढ़ेगी कार्यक्षमता
सहकारी संस्थाओं को आधुनिक तकनीक और डिजिटल सेवाओं से जोड़ने पर विशेष जोर दिया गया। सहकारिता आंदोलन को समयानुकूल बनाने के लिए ऑनलाइन सेवाओं, डिजिटल भुगतान और बेहतर विपणन व्यवस्था को बढ़ावा दिया जाएगा। इससे सहकारी संस्थाओं की कार्यक्षमता और पारदर्शिता दोनों में वृद्धि होगी।
सहकार से समृद्धि के लक्ष्य पर फोकस
मंत्री केदार कश्यप ने कहा कि सहकारिता आंदोलन का अंतिम उद्देश्य समाज के अंतिम व्यक्ति तक विकास का लाभ पहुंचाना है। “सहकार से समृद्धि” की अवधारणा को साकार करने के लिए सभी संस्थाओं को मिलकर काम करना होगा। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ को देश के अग्रणी सहकारी राज्यों में शामिल करना सरकार का प्रमुख लक्ष्य है।
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