Agnipath Scheme

भारत सरकार की Agnipath Scheme अब एक नए मोड़ पर पहुंचती दिखाई दे रही है। वर्ष 2023 में प्रशिक्षण शुरू करने वाला पहला अग्निवीर बैच इस साल अपना चार साल का कार्यकाल पूरा करेगा। इसी बीच खबर है कि भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना प्रशिक्षित अग्निवीरों को पहले की तुलना में अधिक संख्या में स्थायी सेवा में रखने का प्रस्ताव तैयार कर रही हैं। हालांकि इस संबंध में अभी सरकार की ओर से कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है।

रिपोर्टों के अनुसार तीनों सेनाओं का मानना है कि चार वर्षों में तैयार हुए प्रशिक्षित जवानों को सेवा से बाहर करना सैन्य दृष्टि से नुकसानदायक हो सकता है। इसलिए अब रिटेंशन नीति की समीक्षा पर चर्चा तेज हो गई है।

चार साल बाद क्यों बदला सेना का नजरिया?

जब अग्निपथ योजना लागू हुई थी, तब इसका उद्देश्य युवा और तकनीक आधारित सेना तैयार करना था। योजना के तहत भर्ती होने वाले अग्निवीरों को चार वर्षों तक सेवा देने का अवसर मिलता है। मौजूदा नियमों के अनुसार केवल 25 प्रतिशत अग्निवीर ही नियमित सैनिक बन सकते हैं।

अब चार वर्षों के अनुभव के बाद सेना को महसूस हुआ है कि इन जवानों ने आधुनिक हथियारों, ड्रोन तकनीक, निगरानी प्रणाली और डिजिटल युद्ध प्रणाली में महत्वपूर्ण दक्षता हासिल कर ली है। ऐसे प्रशिक्षित जवानों को बनाए रखने से सेना की परिचालन क्षमता और मजबूत हो सकती है। इसी कारण Agnipath Scheme में बदलाव की चर्चा हो रही है।

मुख्य अपडेट

  • पहला अग्निवीर बैच 2026 में कार्यकाल पूरा करेगा।
  • वर्तमान में 25 प्रतिशत रिटेंशन का नियम लागू है।
  • नौसेना 75 प्रतिशत तक रिटेंशन चाहती है।
  • सेना और वायुसेना 50 प्रतिशत तक रिटेंशन बढ़ाने के पक्ष में हैं।
  • अंतिम फैसला केंद्र सरकार और रक्षा मंत्रालय को लेना है।

तीनों सेनाओं की जरूरत अलग क्यों है?

भारतीय नौसेना अत्याधुनिक युद्धपोतों, पनडुब्बियों और जटिल तकनीकी प्रणालियों का संचालन करती है। इन प्रणालियों को संभालने के लिए लंबे समय तक प्रशिक्षित और अनुभवी कर्मियों की आवश्यकता होती है। इसलिए नौसेना सबसे अधिक अग्निवीरों को नियमित सेवा में बनाए रखने के पक्ष में बताई जा रही है।

वहीं भारतीय सेना और वायुसेना भी मौजूदा सीमा बढ़ाकर लगभग 50 प्रतिशत तक रिटेंशन करने का सुझाव दे रही हैं। हालांकि Agnipath Scheme के नियमों में कोई बदलाव अभी लागू नहीं हुआ है।

फिलहाल क्या कहता है मौजूदा नियम?

वर्तमान व्यवस्था के अनुसार चार वर्ष पूरे होने पर सभी अग्निवीरों का कार्यकाल समाप्त होगा। इसके बाद मेरिट, मेडिकल फिटनेस, प्रदर्शन और सेना की आवश्यकता के आधार पर अधिकतम 25 प्रतिशत अग्निवीरों का चयन नियमित सेवा के लिए किया जाएगा।

रिपोर्ट के अनुसार इस विषय पर पहले भी सैन्य मामलों के विभाग को प्रस्ताव भेजा गया था। अब पहले बैच के कार्यकाल पूरा होने के कारण इस पर दोबारा विचार किया जा रहा है।

सेना को क्या होगा फायदा?

यदि अधिक अग्निवीरों को नियमित सेवा में रखा जाता है तो सेना को कई लाभ मिल सकते हैं।

  • प्रशिक्षित सैनिकों का बड़ा समूह उपलब्ध रहेगा।
  • नई भर्ती और प्रशिक्षण पर खर्च कम होगा।
  • ऑपरेशनल यूनिट्स की क्षमता मजबूत होगी।
  • तकनीकी विशेषज्ञता लगातार बनी रहेगी।
  • युद्ध की तैयारी और प्रतिक्रिया समय बेहतर होगा।

अग्निवीरों को सेवा पूरी होने के बाद क्या मिलेगा?

जो अग्निवीर नियमित सेवा के लिए चयनित नहीं होंगे, उन्हें सेवा निधि पैकेज मिलेगा। इसमें लगभग ₹11.71 लाख की कर-मुक्त राशि, ब्याज सहित प्रदान की जाएगी। इसके अलावा स्किल सर्टिफिकेट और अनुभव प्रमाणपत्र भी दिया जाएगा।

सरकार ने सीएपीएफ और असम राइफल्स की भर्ती में 10 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान किया है। पहले बैच को आयु सीमा में पांच वर्ष और बाद के बैचों को तीन वर्ष की छूट मिलेगी। कई राज्यों ने भी पुलिस भर्ती और अन्य सरकारी नौकरियों में प्राथमिकता देने की घोषणा की है।

एक नजर में

  • सेवा निधि पैकेज का लाभ।
  • कौशल और अनुभव प्रमाणपत्र।
  • सीएपीएफ व असम राइफल्स में 10% आरक्षण।
  • सरकारी नौकरियों में आयु सीमा में छूट।
  • निजी क्षेत्र में रोजगार सहायता।
  • ब्रिज कोर्स और उच्च शिक्षा के अवसर।

क्या भविष्य में बड़ा बदलाव संभव है?

पहले बैच के प्रदर्शन ने तीनों सेनाओं को यह विश्वास दिलाया है कि प्रशिक्षित अग्निवीर लंबे समय तक सैन्य क्षमता को मजबूत कर सकते हैं। यही कारण है कि Agnipath Scheme के रिटेंशन मॉडल की समीक्षा हो रही है।

हालांकि सरकार की ओर से अभी कोई आधिकारिक निर्णय नहीं लिया गया है। यदि भविष्य में रिटेंशन प्रतिशत बढ़ाया जाता है, तो यह योजना लागू होने के बाद सबसे बड़ा बदलाव माना जाएगा। इससे सेना को अनुभवी सैनिक मिलेंगे और युवाओं के लिए स्थायी सैन्य सेवा के अवसर भी बढ़ सकते हैं।

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