तीजन बाई श्रद्धांजलि

छत्तीसगढ़ विधानसभा के पावास सत्र में तीजन बाई को श्रद्धांजलि दी गई। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने प्रसिद्ध पंडवानी गायिका के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ ने अपनी लोकसंस्कृति का अमूल्य रत्न खो दिया है।

साथ ही उन्होंने उनके योगदान को सदैव प्रेरणादायी बताया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उनका जीवन संघर्ष और समर्पण का उदाहरण था। इसलिए नई पीढ़ी को उनके कार्यों से प्रेरणा लेनी चाहिए। उन्होंने कहा कि लोककला के संरक्षण में उनका योगदान अविस्मरणीय रहेगा।

मुख्य बातें

  • विधानसभा में तीजन बाई को श्रद्धांजलि दी गई।
  • मुख्यमंत्री ने लोककला के योगदान को याद किया।
  • पंडवानी को वैश्विक पहचान दिलाने के लिए सराहना हुई।
  • पद्म विभूषण सहित कई सम्मान का उल्लेख किया।
  • नई पीढ़ी के लिए प्रेरणादायी जीवन बताया।

तीजन बाई श्रद्धांजलि में उपलब्धियों का किया उल्लेख

मुख्यमंत्री ने कहा कि तीजन बाई की श्रद्धांजलि केवल एक कलाकार को याद करना नहीं है। यह छत्तीसगढ़ की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को सम्मान देने का अवसर भी है। उन्होंने कहा कि तीजन बाई ने पंडवानी की कापालिक शैली को नई पहचान दिलाई।

उन्होंने देश और विदेश के अनेक मंचों पर शानदार प्रस्तुतियाँ दीं। वहीं उनकी कला ने छत्तीसगढ़ को वैश्विक स्तर पर नई पहचान दिलाई।

इसके अलावा उनकी प्रभावशाली शैली ने लाखों लोगों को प्रभावित किया।

राष्ट्रीय सम्मान और प्रेरणादायी जीवन

मुख्यमंत्री ने कहा कि तीजन बाई को पद्मश्री, पद्म भूषण और संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार सहित कई सम्मान मिले। वर्ष 2019 में उन्हें पद्म विभूषण से भी सम्मानित किया गया। वह यह सम्मान पाने वाली छत्तीसगढ़ की पहली विभूति थीं।

उन्होंने बताया कि कई विश्वविद्यालयों ने उन्हें मानद डी.लिट्. उपाधि प्रदान की। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी उनके योगदान को याद किया।

तीजन बाई श्रद्धांजलि के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी कला आने वाली पीढ़ियों का मार्गदर्शन करती रहेगी।

मुख्यमंत्री ने दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की। साथ ही शोक संतप्त परिवार और कला प्रेमियों के प्रति संवेदना व्यक्त की।

एक नजर में

  • अवसर: विधानसभा पावस सत्र
  • स्थान: रायपुर
  • श्रद्धांजलि देने वाले: मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय
  • प्रमुख पहचान: विश्वविख्यात पंडवानी कलाकार
  • सर्वोच्च सम्मान: पद्म विभूषण

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