तमिलनाडु के Karur Stampede Case में मद्रास हाई कोर्ट की मदुरै पीठ ने राज्य सरकार के एक महत्वपूर्ण फैसले को रद्द कर दिया है। अदालत ने करूर भगदड़ में जान गंवाने वाले लोगों के परिजनों को अनुकंपा के आधार पर सरकारी नौकरी देने संबंधी सरकारी आदेश निरस्त कर दिया। यह फैसला जनहित याचिकाओं पर सुनवाई के बाद सुनाया गया।
Karur Stampede Case में हाई कोर्ट ने क्या कहा?
अदालत ने कहा कि करूर भगदड़ मामले की जांच फिलहाल केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) कर रही है। साथ ही इस जांच की निगरानी सुप्रीम कोर्ट के स्तर पर की जा रही है। ऐसे में मामले के तथ्यों और जिम्मेदारी पर कोई टिप्पणी करना उचित नहीं होगा।
इसी आधार पर अदालत ने राज्य सरकार द्वारा जारी सरकारी आदेशों को रद्द कर दिया। न्यायालय ने संकेत दिया कि जांच पूरी होने से पहले इस तरह के प्रशासनिक निर्णयों पर सावधानी बरतना आवश्यक है।
मुख्य बातें
- मद्रास हाई कोर्ट ने सरकारी आदेश निरस्त किया।
- मामला सीबीआई जांच के अधीन है।
- सुप्रीम कोर्ट जांच की निगरानी कर रहा है।
- जनहित याचिकाओं पर सुनवाई के बाद फैसला आया।
- अदालत ने मामले के गुण-दोष पर टिप्पणी नहीं की।
सरकार ने पुनर्वास के लिए क्या फैसला लिया था?
सितंबर 2025 की करूर भगदड़ में 41 लोगों की मौत हुई थी। इसके बाद मुख्यमंत्री विजय ने प्रभावित परिवारों के पुनर्वास के लिए विशेष योजना शुरू की थी।
सरकार ने मृतकों के परिवारों के एक पात्र सदस्य को सरकारी नौकरी देने का निर्णय लिया। मुख्यमंत्री ने अपने करूर दौरे के दौरान 32 पात्र लाभार्थियों को नियुक्ति पत्र भी सौंपे थे।
Karur Stampede Case में पुनर्वास योजना क्यों बनी विवाद का कारण?
राज्य सरकार ने इस योजना को मानवीय सहायता और पुनर्वास का हिस्सा बताया था। हालांकि कुछ याचिकाकर्ताओं ने इसे अदालत में चुनौती दी। उनका तर्क था कि मामले की जांच पूरी होने से पहले ऐसे आदेश जारी करना उचित नहीं है।
इसी के बाद अदालत ने पूरे मामले की सुनवाई की और सरकारी आदेश को निरस्त करने का फैसला सुनाया।
मुख्यमंत्री विजय के करूर दौरे की प्रमुख बातें
मुख्यमंत्री विजय ने करूर पहुंचकर पीड़ित परिवारों से मुलाकात की थी। उन्होंने जिला कलेक्टर कार्यालय में परिजनों की समस्याएं सुनीं और पुनर्वास उपायों की जानकारी दी।
इसके बाद एक सार्वजनिक कार्यक्रम में सरकार की ओर से राहत और सहायता योजनाओं की घोषणा की गई। इन्हीं निर्णयों के तहत सरकारी नौकरी देने का आदेश भी जारी किया गया था।
प्रमुख अपडेट
- करूर भगदड़ में 41 लोगों की मौत हुई।
- 32 पात्र सदस्यों को नियुक्ति पत्र दिए गए।
- पुनर्वास योजना को अदालत में चुनौती मिली।
- सीबीआई मामले की जांच कर रही है।
- सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जांच जारी है।
आगे क्या होगी कानूनी प्रक्रिया?
Karur Stampede Case में हाई कोर्ट के फैसले के बाद अब सरकारी नौकरी देने का आदेश प्रभावी नहीं रहेगा। आगे की कार्रवाई सीबीआई जांच और न्यायिक प्रक्रिया के परिणाम पर निर्भर करेगी।
यदि राज्य सरकार चाहे तो वह इस फैसले के खिलाफ कानूनी विकल्प अपना सकती है। फिलहाल Karur Stampede Case में अदालत का निर्णय यह स्पष्ट करता है कि जांच पूरी होने तक पुनर्वास से जुड़े प्रशासनिक आदेश भी न्यायिक समीक्षा के दायरे में आ सकते हैं। इससे भविष्य में ऐसे मामलों में सरकारी निर्णयों की प्रक्रिया पर भी असर पड़ सकता है।
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