शर्मिला धनखड़

हरियाणा की पैरा एथलीट शर्मिला धनखड़ ने कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में महिला शॉट पुट F57 स्पर्धा का स्वर्ण पदक जीतकर भारतीय खेल इतिहास में नया अध्याय जोड़ दिया। उनकी यह उपलब्धि केवल एक पदक तक सीमित नहीं है। यह उन सभी लोगों के लिए प्रेरणा है, जो कठिन परिस्थितियों के बावजूद अपने सपनों को पूरा करने का साहस रखते हैं।

ग्लासगो में हुए फाइनल मुकाबले में उन्होंने 9.81 मीटर का सर्वश्रेष्ठ थ्रो किया। इस प्रदर्शन के साथ वह कॉमनवेल्थ गेम्स के इतिहास में पैरा एथलेटिक्स में भारत के लिए स्वर्ण जीतने वाली पहली खिलाड़ी बन गईं। इसके अलावा भारत को करीब 20 वर्षों बाद इस प्रतियोगिता में पैरा एथलेटिक्स का पदक भी मिला।

शर्मिला धनखड़ का संघर्ष बना प्रेरणा

महेंद्रगढ़ जिले के चित्रौली गांव में जन्मी शर्मिला धनखड़ का बचपन बेहद कठिन परिस्थितियों में बीता। दो वर्ष की उम्र में पोलियो ने उनका एक पैर प्रभावित कर दिया। परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर थी। पिता छोटे किसान थे और मां दृष्टिबाधित थीं। इसके बावजूद उन्होंने जीवन की चुनौतियों के आगे हार नहीं मानी।

कम उम्र में उनकी शादी हुई, लेकिन वैवाहिक जीवन में उन्हें घरेलू हिंसा का सामना करना पड़ा। दो बेटियों के साथ मायके लौटने के बाद उन्होंने परिवार का खर्च चलाने के लिए सफाईकर्मी, घरेलू सहायक और सुरक्षा गार्ड जैसी कई नौकरियां कीं। यही संघर्ष आगे चलकर उनकी सबसे बड़ी ताकत बना।

देर से शुरू हुआ खेल करियर, लेकिन मिला बड़ा मुकाम

28 वर्ष की उम्र में दूसरी शादी के बाद उनके जीवन में नया मोड़ आया। पति अजीत सिंह ने उन्हें पैरा खेलों में करियर बनाने के लिए प्रेरित किया। 34 वर्ष की उम्र में उन्होंने पहली बार पेशेवर प्रशिक्षण शुरू किया। कोच टेकचंद और देवेंद्र के मार्गदर्शन में उन्होंने राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई।

आर्थिक संकट के बावजूद परिवार ने उनका सपना पूरा करने के लिए रेवाड़ी स्थित अपना घर तक बेच दिया। इसके बाद प्रशिक्षण और प्रतियोगिताओं की तैयारी लगातार जारी रही। कठिन मेहनत का परिणाम आखिरकार कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में देखने को मिला।

शर्मिला धनखड़ ने भारत को दिलाया ऐतिहासिक स्वर्ण

2022 के बर्मिंघम कॉमनवेल्थ गेम्स और 2023 के एशियाई पैरा खेलों में पदक से चूकने के बाद भी उन्होंने अभ्यास जारी रखा। लगातार मेहनत और आत्मविश्वास के दम पर शर्मिला धनखड़ ने ग्लासगो में अपने करियर का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया और स्वर्ण पदक जीत लिया।

इस प्रतियोगिता में भारत ने पहली बार पैरा एथलेटिक्स में डबल पोडियम फिनिश भी दर्ज किया। यह उपलब्धि भारतीय पैरा खेलों के लिए ऐतिहासिक मानी जा रही है। उनकी जीत ने देशभर के खिलाड़ियों और खेल प्रेमियों का उत्साह बढ़ाया है।

बेटियों के भविष्य को मानती हैं सबसे बड़ी जीत

स्वर्ण पदक जीतने के बाद शर्मिला धनखड़ ने कहा कि उनकी सबसे बड़ी खुशी अपनी दोनों बेटियों का उज्ज्वल भविष्य है। बड़ी बेटी जेवलिन थ्रो और छोटी बेटी लंबी कूद में हिस्सा लेती हैं। वह चाहती हैं कि उनकी बेटियां आत्मविश्वास के साथ अपने सपनों को पूरा करें और जीवन में किसी भी चुनौती से न डरें।

उनकी कहानी यह साबित करती है कि कठिन परिस्थितियां सफलता की राह रोक नहीं सकतीं। दृढ़ इच्छाशक्ति, मेहनत और निरंतर प्रयास से हर लक्ष्य हासिल किया जा सकता है।

एक नजर में

  • महिला शॉट पुट F57 में ऐतिहासिक स्वर्ण पदक।
  • भारत को पैरा एथलेटिक्स का पहला कॉमनवेल्थ गोल्ड।
  • पोलियो और घरेलू हिंसा के बावजूद नहीं मानी हार।
  • परिवार ने प्रशिक्षण के लिए घर तक बेच दिया।
  • संघर्ष से सफलता तक का सफर बना लाखों लोगों की प्रेरणा।

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