हर्ष सिंह

कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 भारतीय खेल इतिहास के लिए यादगार बन गए। हर्ष सिंह ने पुरुषों के 60 किलोग्राम वर्ग में शानदार प्रदर्शन करते हुए स्वर्ण पदक अपने नाम किया। इसी जीत के साथ वह राष्ट्रमंडल खेलों में पुरुष जूडो स्पर्धा में गोल्ड जीतने वाले पहले भारतीय खिलाड़ी बन गए।

23 वर्षीय खिलाड़ी की यह उपलब्धि केवल व्यक्तिगत सफलता नहीं है। यह भारतीय जूडो के लंबे इंतजार का अंत भी है। वर्षों से जिस उपलब्धि का सपना देखा जा रहा था, उसे हर्ष ने ग्लास्गो में साकार कर दिखाया।

छोटे मैट से विश्व मंच तक का सफर

बचपन से ही हर्ष सिंह ने जूडो को अपना लक्ष्य बना लिया था। दूसरे बच्चों की तरह छुट्टियां बिताने के बजाय वह अभ्यास में समय लगाते थे। लगातार मेहनत और अनुशासन ने उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई।

राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में शानदार प्रदर्शन के बाद उन्हें भारतीय खेल प्राधिकरण (SAI) के प्रशिक्षण शिविर में जगह मिली। यहीं से उनके अंतरराष्ट्रीय करियर की मजबूत नींव रखी गई।

अंतरराष्ट्रीय अनुभव ने बदली पहचान

विश्व स्तर पर सफलता आसान नहीं होती। हर्ष सिंह ने इंटरनेशनल जूडो फेडरेशन (IJF) के कई बड़े टूर्नामेंटों में हिस्सा लिया। उन्होंने टोक्यो ग्रैंड स्लैम, ताशकंद ग्रैंड स्लैम और सीनियर एशियन चैंपियनशिप में भारत का प्रतिनिधित्व किया।

इन प्रतियोगिताओं में मिली हार ने उन्हें और मजबूत बनाया। लगातार अभ्यास और अनुभव ने उन्हें दुनिया के शीर्ष खिलाड़ियों के बीच प्रतिस्पर्धा करने के योग्य बनाया।

फाइनल मुकाबले में दिखाया दम

स्वर्ण पदक मुकाबले में उनका सामना ऑस्ट्रेलिया के शीर्ष वरीय खिलाड़ी जोशुआ काट्ज से हुआ। मुकाबला बेहद रोमांचक रहा। अंतिम क्षणों में हर्ष ने शानदार तकनीक का इस्तेमाल करते हुए निर्णायक बढ़त हासिल कर ली।

वाजा-आरी अंक के साथ उन्होंने मुकाबला अपने नाम किया और भारत को ऐतिहासिक स्वर्ण पदक दिलाया। इसी जीत ने हर्ष सिंह को भारतीय खेल इतिहास के सुनहरे पन्नों में दर्ज कर दिया।

भारतीय जूडो के लिए नई उम्मीद

हर्ष की जीत से कुछ घंटे पहले अस्मिता डे भी महिलाओं की 48 किलोग्राम स्पर्धा में गोल्ड जीत चुकी थीं। पहली बार भारत ने एक ही कॉमनवेल्थ गेम्स में जूडो में दो स्वर्ण पदक जीतने का रिकॉर्ड बनाया।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू सहित कई हस्तियों ने खिलाड़ियों को बधाई दी। हर्ष सिंह की सफलता अब देशभर के युवा खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा बन चुकी है।

मेहनत और धैर्य की मिसाल बने हर्ष

23 वर्ष की उम्र में हर्ष सिंह ने वह उपलब्धि हासिल की, जिसका भारतीय जूडो लंबे समय से इंतजार कर रहा था। उनकी कहानी बताती है कि निरंतर मेहनत, अनुशासन और आत्मविश्वास किसी भी खिलाड़ी को इतिहास रचने की ताकत दे सकते हैं।


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