Monsoon Litti Chokha Recipe – बारिश के मौसम में परोसी गई गरमागरम थाली

बारिश में लिट्टी चोखा रेसिपी: सत्तू से बना यह व्यंजन कैसे बनाएं घर पर

बारिश का मौसम शुरू होते ही सड़क किनारे के तले-भुने स्नैक्स की तरफ मन खिंचता है, लेकिन नमी और बदलते तापमान में बाहर का खाना पेट खराब करने का सबसे बड़ा कारण बनता है। ऐसे में बिहार का पारंपरिक व्यंजन लिट्टी चोखा एक बेहतर घरेलू विकल्प के रूप में सामने आता है। लिट्टी चोखा सत्तू से भरे गेहूं के आटे के गोलों (लिट्टी) और भुनी सब्जियों से बने मसालेदार चोखे से बनता है। इसे भूनकर या बेककर बनाया जाता है, तेल का इस्तेमाल कम होता है, और सत्तू पचाने में आसान माना जाता है। यही वजह है कि मानसून में यह हल्के, घर के बने भोजन के तौर पर लोकप्रिय है।

मुख्य बातें:

  • लिट्टी गेहूं के आटे और भुने चने के सत्तू से बनती है, चोखा बैंगन, आलू और टमाटर को भूनकर तैयार होता है।
  • दोनों को आमतौर पर तला नहीं, बल्कि भूना या बेक किया जाता है, जिससे यह अपेक्षाकृत हल्का व्यंजन बनता है।
  • सत्तू में प्रोटीन और फाइबर अच्छी मात्रा में होता है, और इसे पचने में आसान माना गया है।
  • दो लिट्टी और चोखे की एक सर्विंग में लगभग 50 ग्राम कार्ब्स, 6.8 ग्राम फैट, 10.4 ग्राम प्रोटीन और 8.4 ग्राम फाइबर होता है।
  • मानसून में बाहर के तले-भुने स्नैक्स की जगह यह घर पर बनाया गया विकल्प ज्यादा सुरक्षित माना जा सकता है।

Monsoon Litti Chokha Recipe क्यों है फायदेमंद इस बारिश के मौसम में

लिट्टी गेहूं के आटे से बनी लोई होती है, जिसमें भुने चने यानी सत्तू का मसालेदार मिश्रण भरा जाता है। चोखा बैंगन, आलू और टमाटर जैसी सब्जियों को उबालकर या भूनकर बनाई गई एक साधारण मसली हुई डिश है।

मानसून में गीले मौसम की वजह से तला हुआ, भारी खाना पचने में समय लेता है। चोखा इस थाली का सबसे सेहतमंद हिस्सा माना जाता है क्योंकि यह भुनी सब्जियों से बनता है और इसमें फाइबर व एंटीऑक्सीडेंट अच्छी मात्रा में होते हैं। वहीं लिट्टी में तेल का इस्तेमाल बहुत कम होता है, जिससे इसे अपेक्षाकृत हल्का व्यंजन माना जा सकता है।

हालांकि, स्वाद बढ़ाने के लिए परोसते वक्त लिट्टी पर देसी घी लगाया जाता है, जिससे इसकी कैलोरी बढ़ जाती है। इसलिए मानसून में हल्का खाना चाहने वालों को घी की मात्रा सीमित रखनी चाहिए।

सत्तू के फायदे

सत्तू, यानी भुने चने का आटा, इस रेसिपी की जान है। यह प्रोटीन से भरपूर होता है, जिससे मांसपेशियों को सहारा मिलता है और लंबे समय तक ऊर्जा बनी रहती है। साथ ही, सत्तू को पचाने में आसान और पेट के लिए आरामदायक माना जाता है, जिसकी ठंडक देने वाली प्रकृति इसे एक सुकून भरा भोजन बनाती है।

इसके अलावा चोखे में इस्तेमाल होने वाली टमाटर और बैंगन जैसी सब्जियां विटामिन और मिनरल्स का भी स्रोत मानी जाती हैं।

सामग्री

लिट्टी के लिए:

  • गेहूं का आटा – 2 कप
  • अजवाइन – 1 छोटा चम्मच
  • नमक – स्वादानुसार
  • घी या तेल – 2 बड़े चम्मच (आटे में मोयन के लिए)
  • सत्तू – 1.5 कप
  • अचार का मसाला/पंच फोरन – 1 छोटा चम्मच
  • नींबू का रस, बारीक कटा प्याज, लहसुन, हरी मिर्च, धनिया पत्ती – स्वादानुसार

चोखे के लिए:

  • बैंगन – 1 बड़ा
  • आलू – 2 मध्यम
  • टमाटर – 2 मध्यम
  • लहसुन, हरी मिर्च, प्याज – बारीक कटे हुए
  • सरसों का तेल – 2 बड़े चम्मच
  • नमक और नींबू का रस – स्वादानुसार

बनाने की विधि

  1. आटे में अजवाइन, नमक और मोयन मिलाकर सख्त आटा गूंथें और 15-20 मिनट ढककर रखें।
  2. सत्तू में मसाले, प्याज, लहसुन, हरी मिर्च, नींबू का रस और थोड़ा पानी मिलाकर भरावन तैयार करें।
  3. आटे की लोई में भरावन भरकर गोल आकार दें।
  4. लिट्टी को अवन में 200 डिग्री सेल्सियस पर 25-30 मिनट तक या तवे/कड़ाही में ढककर धीमी आंच पर सुनहरा होने तक सेकें।
  5. बैंगन, आलू और टमाटर को सीधी आंच या ओवन में भूनें, ठंडा होने पर छिलका उतारें।
  6. भुनी सब्जियों को मैश करके उसमें प्याज, लहसुन, मिर्च, नमक, सरसों का तेल और नींबू मिलाकर चोखा तैयार करें।
  7. गरमागरम लिट्टी को हल्के घी के साथ चोखे और धनिया-हरी मिर्च की चटनी के साथ परोसें।

सावधानियां

  • मानसून में सब्जियां अच्छी तरह धोकर ही इस्तेमाल करें, ताकि मिट्टी या कीटाणु न रह जाएं।
  • लिट्टी को अच्छी तरह पका लें, अधपकी लिट्टी पेट खराब कर सकती है।
  • हाई ब्लड प्रेशर वाले लोग नमक की मात्रा सीमित रखें, और वजन कम करने की कोशिश कर रहे लोग घी व तेल कम इस्तेमाल करें।

डिस्क्लेमर: यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी के लिए है। इसे चिकित्सकीय सलाह का विकल्प न मानें। किसी बीमारी, दवा या डाइट में बदलाव से पहले योग्य डॉक्टर या डायटीशियन से सलाह लें।

8. क्वालिटी ऑडिट

भरे गेहूं के आटे के गोलों (लिट्टी) और भुनी सब्जियों से बने मसालेदार चोखे से बनता है। इसे भूनकर या बेककर बनाया जाता है, तेल का इस्तेमाल कम होता है, और सत्तू पचाने में आसान माना जाता है। यही वजह है कि मानसून में यह हल्के, घर के बने भोजन के तौर पर लोकप्रिय है।

सत्तू, यानी भुने चने का आटा

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