नारी शक्ति वंदन अधिनियम

महिलाओं को संसद और विधानसभाओं में 33 प्रतिशत आरक्षण देने वाले नारी शक्ति वंदन अधिनियम को लेकर एक बार फिर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने केंद्र सरकार से पूछा है कि संसद से कानून पारित होने के बावजूद इसे अब तक लागू क्यों नहीं किया गया। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि इस कानून को परिसीमन प्रक्रिया से जोड़ने की आवश्यकता क्या है। इस मुद्दे पर सरकार और विपक्ष आमने-सामने दिखाई दे रहे हैं।

मुख्य बातें

  • राहुल गांधी ने कानून को तुरंत लागू करने की मांग की।
  • किरेन रिजिजू ने कांग्रेस को बिना शर्त समर्थन देने की चुनौती दी।
  • कांग्रेस ने कहा कि कानून पहले ही सर्वसम्मति से पारित हो चुका है।
  • विपक्ष परिसीमन की शर्त हटाने की मांग कर रहा है।
  • महिला आरक्षण को लेकर राजनीतिक बहस फिर तेज हो गई है।

नारी शक्ति वंदन अधिनियम पर राहुल गांधी ने क्या कहा?

राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पर कहा कि कांग्रेस ने 2023 में पारित महिला आरक्षण विधेयक का पूरा समर्थन किया था। उन्होंने केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू से पूछा कि जब संसद कानून पारित कर चुकी है, तो उसके क्रियान्वयन में देरी क्यों हो रही है।

राहुल गांधी का कहना है कि महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण बिना किसी अतिरिक्त शर्त के मिलना चाहिए। उन्होंने सरकार से कानून को तुरंत लागू करने की मांग दोहराई।

केंद्र सरकार और किरेन रिजिजू का क्या रुख है?

केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने राहुल गांधी के बयान को सकारात्मक बताया। उन्होंने कहा कि यदि कांग्रेस वास्तव में महिलाओं के अधिकारों के पक्ष में है, तो उसे नारी शक्ति वंदन अधिनियम का बिना शर्त समर्थन करना चाहिए।

रिजिजू के बयान के बाद कांग्रेस ने स्पष्ट किया कि वह पहले ही संसद में इस कानून के समर्थन में मतदान कर चुकी है। इसलिए अब सवाल केवल इसके लागू होने का है।

नारी शक्ति वंदन अधिनियम लागू होने में देरी क्यों?

सरकार का कहना है कि कानून लागू करने से पहले परिसीमन और उससे जुड़ी संवैधानिक प्रक्रियाएं पूरी करनी होंगी। दूसरी ओर विपक्ष इस शर्त का विरोध कर रहा है।

विपक्षी दलों का तर्क है कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम को परिसीमन से अलग लागू किया जा सकता है। उनका मानना है कि महिलाओं को आरक्षण देने में और देरी उचित नहीं होगी।

विपक्ष की मुख्य मांग क्या है?

कांग्रेस सहित कई विपक्षी दल चाहते हैं कि महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण जल्द मिले। उनका कहना है कि कानून लागू करने को परिसीमन से जोड़ना आवश्यक नहीं है।

विपक्ष का दावा है कि संसद से पारित कानून के क्रियान्वयन में अनावश्यक विलंब महिलाओं के राजनीतिक प्रतिनिधित्व को प्रभावित कर रहा है।

एक नजर में

  • 2023 में संसद ने महिला आरक्षण कानून पारित किया।
  • राहुल गांधी ने तत्काल लागू करने की मांग उठाई।
  • किरेन रिजिजू ने कांग्रेस को चुनौती दी।
  • परिसीमन को लेकर सरकार और विपक्ष में मतभेद हैं।
  • कानून लागू करने पर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई।
  • महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने पर बहस जारी है।

आगे क्या हो सकता है?

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम आने वाले समय में संसद और चुनावी राजनीति का बड़ा मुद्दा बना रह सकता है। यदि सरकार और विपक्ष इस विषय पर सहमति बनाते हैं, तो महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी को नई मजबूती मिल सकती है। फिलहाल सभी की नजर सरकार के अगले कदम और कानून के क्रियान्वयन की प्रक्रिया पर टिकी है।


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