नेपाल में आई भीषण बाढ़ ने कई इलाकों में भारी तबाही मचाई। तेज बहाव अपने साथ घर, वाहन और लोगों को बहा ले गया। इस आपदा के बीच कई लोगों ने ऊंची जगहों और जंगलों में पहुंचकर जान बचाई। हालांकि, उनके सामने अपनों के बिछड़ने का दर्द भी है।
नेपाल बाढ़ त्रासदी के बीच बचने की जद्दोजहद
प्रभावित इलाकों से लौटे लोगों ने उस भयावह रात के अनुभव साझा किए। किसी ने पानी और मलबे को तेजी से अपनी ओर बढ़ते देखा। किसी ने घरों को कुछ ही पलों में ढहते देखा। कई लोगों ने दोस्तों और रिश्तेदारों को तेज धार में बहते हुए देखा।
तिमुरे में मौजूद दीपक तमांग ने बताया कि उन्हें शुरुआत में जमीन हिलने जैसा महसूस हुआ। इसके बाद उन्होंने कीचड़ और पत्थरों से भरे पानी को बस्ती की ओर आते देखा। उनके सामने पहाड़ी थी और पीछे तेज बहाव बढ़ रहा था। ऐसे में उन्होंने तुरंत ऊंचाई की ओर भागने का फैसला किया।
पहाड़ी पर भागकर बचाई जान
दीपक तमांग के मुताबिक, भागते समय कई घर पहले ही गिर चुके थे। रास्ते में उन्हें लगातार पानी और मलबे का खतरा महसूस हो रहा था। किसी तरह वह पहाड़ी की चोटी तक पहुंच गए।
वहां से उन्होंने कई लोगों को बाढ़ में बहते देखा। उनके दोस्तों में भी कुछ लोग इस तेज बहाव की चपेट में आ गए। वह चाहकर भी उनकी मदद नहीं कर सके। बाद में उन्हें एक पुराने गोदाम में शरण मिली। करीब एक दिन बाद बचाव दल ने उन्हें सुरक्षित निकाला।
आपदा से जुड़े प्रमुख घटनाक्रम:
- कई बस्तियां तेज पानी और मलबे की चपेट में आईं।
- प्रभावित लोगों ने ऊंचे स्थानों पर शरण ली।
- कई परिवारों के सदस्य लापता हुए।
- जंगल और पहाड़ी क्षेत्र लोगों के लिए सुरक्षित स्थान बने।
- राहत और बचाव अभियान के जरिए लोगों को निकाला गया।
नेपाल बाढ़ त्रासदी में तार बना जीवन का सहारा
रौतहट के रामबच्चन साह की कहानी भी बेहद भयावह है। वह दुकान में काम कर रहे थे। अचानक पानी तेजी से अंदर पहुंचा और उन्हें अपने साथ बहा ले गया।
इसी दौरान उनका हाथ बिजली के एक तार तक पहुंच गया। उन्होंने तार को मजबूती से पकड़ लिया। करीब आधे घंटे तक वह पानी के ऊपर लटके रहे। इस तरह उनकी जान बच सकी।
मामा के परिवार को खोने का दर्द
झापा के सचिन खाती इस आपदा में सुरक्षित बच गए। हालांकि, उनके मामा राज कुमार दियाली का परिवार बाढ़ की चपेट में आ गया। सचिन जब वापस पहुंचे, तब तक पूरी बस्ती तबाह हो चुकी थी।
परिजनों को अब भी लापता लोगों की जानकारी मिलने की उम्मीद है। परिवार के सदस्य अपनों की तलाश में जुटे हैं। उनके लिए यह इंतजार बेहद पीड़ादायक बना हुआ है।
जंगल और पहाड़ी बनीं लोगों की सुरक्षित पनाह
कई लोगों ने जान बचाने के लिए जंगल और पहाड़ी क्षेत्रों का सहारा लिया। गथे कामी ने बताया कि नदी का पानी अचानक तेजी से बढ़ा। उन्होंने आसपास के लोगों को सतर्क किया और खुद जंगल की ओर चले गए।
कुछ समय बाद जब उन्होंने नीचे देखा, तो बस्ती मलबे में बदल चुकी थी। उनके मुताबिक, उस पल को भूल पाना आसान नहीं है।
राजू बुधाथोकी ने भी बताया कि तिमुरे में उन्हें भूकंप जैसा एहसास हुआ। वह तुरंत बाहर निकले और ऊंचाई की ओर भागे। कुछ ही समय बाद बस्ती के कई घर नदी में समा गए।
आंखों के सामने बहती रही बस्ती
फोटो जर्नलिस्ट अमूल थापा ने प्रभावित इलाकों में तबाही के कई दृश्य देखे। बाजारों में मलबा जमा था। लोग अपने लापता रिश्तेदारों के बारे में जानकारी जुटा रहे थे।
कुछ शव नारायणी नदी से बरामद किए जाने की जानकारी भी सामने आई। वहीं, कई लोग जंगल के रास्ते लंबी दूरी तय करके सुरक्षित स्थानों तक पहुंचे।
भारतीय-अमेरिकी दंपत्ति अंजना राजा और पट्टाभिरामन वेंकटेशन भी इस आपदा में फंस गए थे। बाद में दोनों को बचाकर काठमांडू ले जाया गया। उनके अनुभव ने भी सैलाब की भयावहता को सामने रखा।
नेपाल बाढ़ त्रासदी ने छोड़े गहरे जख्म
राज कुमार कार्की ने बताया कि उन्होंने तेज बहाव से आगे निकलने के लिए ट्रक को पहाड़ी दिशा में ले जाया। इससे उनकी जान बच गई। उनके पीछे चल रहे कई कंटेनर ट्रक बह गए।
प्रकाश गौतम ने भी आपदा के दौरान जंगल की ओर भागकर अपनी जान बचाई। बाद में सेना के हेलिकॉप्टर की मदद से उन्हें सुरक्षित निकाला गया।
कुल मिलाकर, नेपाल बाढ़ त्रासदी ने प्रभावित लोगों के सामने जिंदगी की सबसे कठिन परीक्षा रखी। किसी ने तार पकड़कर जीवन बचाया। किसी ने जंगल और पहाड़ी का सहारा लिया। वहीं, कई लोग अब भी अपनों की वापसी का इंतजार कर रहे हैं।
मानवीय पहलू:
- बचे लोगों में अब भी घटना का डर कायम है।
- कई परिवार लापता सदस्यों की तलाश कर रहे हैं।
- प्रभावित क्षेत्रों में तबाही के निशान साफ दिखाई दे रहे हैं।
- कई लोगों को बचाव अभियानों के जरिए सुरक्षित निकाला गया।
- नेपाल बाढ़ त्रासदी के बाद लोगों के सामने पुनर्वास की चुनौती भी है।
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